Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Oct, 2026 12:58 PM

9th day of Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष विधान है। जानें, मां सिद्धिदात्री का प्रिय रंग, बीज मंत्र, भोग, पुष्प और कन्या पूजन व हवन का सही तरीका, जिससे घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि।
9th day of Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जारी है। यह समय मां दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ और साधना के साथ-साथ मन को शांत रखने, धैर्य बनाए रखने और क्रोध का त्याग करने के लिए भी विशेष माना जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान खानपान से लेकर दिनचर्या और व्यवहार तक कई बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
नवरात्रि के नौवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद साफ वस्त्र धारण करें। देवी दुर्गा की पूजा-आराधना आरंभ करें। मंदिर से बासी फूलों को हटाकर मंदिर साफ करें। माता रानी के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित करें। नौवें दिन सिद्धिदात्री मां को कमल का फूल अर्पित करें। मां को लाल वस्त्र या चुनरी चढ़ाएं। मां सिद्धिदात्री के बीज मंत्रों का जाप करें। इस दिन देवी भगवती को नारियल, हलवा, पूड़ी, चना इत्यादि का भोग लगा सकते हैं। इसके बाद सभी देवी-देवताओं के साथ माता रानी की आरती उतारें। दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। नवमी तिथि को मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ हवन और कन्या पूजन के कार्य भी शुभ माने जाते हैं।

मां सिद्धिदात्री का बीज मंत्र
मां सिद्धिदात्री का बीज मंत्र 'ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः" है।

मां सिद्धिदात्री का प्रिय रंग
मां सिद्धिदात्री को सफेद और बैंगनी रंग अति प्रिय है। इस दिन पूजा के दौरान सफेद या बैंगनी वस्त्र धारण कर सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री प्रिय पुष्प व शुभ रंग
नवरात्रि की नवमी को बैंगनी या जामुनी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ होता है। मां सिद्धिदात्री को सफेद कमल प्रिय है। इसके अलावा मां को नीला कमल, चंपा, गुड़हल, चमेली और अपराजिता का पुष्प अर्पित किया जा सकता है।

नवरात्रि के नौवें दिन का महत्व
नवरात्रि के नौवें दिन को माता के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा करने का विधान है। यह दिन इन्हीं को समर्पित होता है। इसे नवमी या महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन हवन करने और कन्या पूजन का विधान है। सभी भक्तों के जीवन में यह पर्व भक्ति की एक नई तरंग लेकर आता है। इस दौरान भक्त विभिन्न प्रकार से माता के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करते हैं।
कमल पुष्प पर विराजमान मां सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं और उनका वाहन सिंह है। देवी जी के सिर पर ऊंचा मुकुट है और उनके चेहरे पर मंद सी मुस्कान है। देवी सिद्धिदात्री, सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं। उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से संभव व सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही वह हर प्रकार के भय व रोगों को भी दूर करती हैं।

यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
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