आध्यात्मिकता का यह पिरामिड, दर्शाता है संपूर्ण सृष्टि के दूर का मार्ग

Edited By Updated: 04 Feb, 2025 01:00 PM

pyramid of spirituality

प्राण शक्ति सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान है। ब्रह्मा से निकली प्राण शक्ति विभिन्न आवृत्तियों या कंपनों में विभाजित है। सूक्ष्मतर तरंगों ने पृथ्वीलोक से परे, भुव, स्वाहा, मह, जन, तप और सत्य जैसे उच्च आयामों

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Pyramid of Spirituality: प्राण शक्ति सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान है। ब्रह्मा से निकली प्राण शक्ति विभिन्न आवृत्तियों या कंपनों में विभाजित है। सूक्ष्मतर तरंगों ने पृथ्वीलोक से परे, भुव, स्वाहा, मह, जन, तप और सत्य जैसे उच्च आयामों में खुद को स्थिर कर लिया। स्थूल आवृत्तियों ने खुद को निचले आयामों-तालों में स्थिर कर लिया। पृथ्वीलोक या भूलोक ही एकमात्र आयाम है, जहां ये सभी आवृत्तियां किसी प्राणी के लिए सुलभ हैं और प्राण की ये अलग-अलग आवृत्तियां, एक पिरामिड संरचना में मौजूद हैं। सबसे स्थूल आवृत्तियां पिरामिड का आधार बनाती हैं और सबसे सूक्ष्म आवृत्ति नुकीला शीर्ष बनाती है। पिरामिड के आधार पर बहुत सी जगह है- हम जिन लोगों से मिलते हैं और बातचीत करते हैं उनमें से अधिकांश लोग इसी तल में मौजूद हैं। वे अपना जीवन बुनियादी इच्छाओं- भोजन, पैसा आदि की खोज में बिताते हैं। जैसे-जैसे कोई पिरामिड में ऊपर बढ़ता है- लोगों की संख्या कम हो जाती है, जबकि शीर्ष पर केवल एक के लिए जगह होती है क्योंकि केवल इतने लोगों के पास ही पहुंच का अधिकार होता है। सेवा भाव एवं परोपकार की भावना ही किसी को ऊपर स्थापित कर पाती हैं।

जब आप योग में प्रगति करते हैं तो प्राण पर नियंत्रण आवश्यक है इससे सिद्धियां प्राप्त होती हैं तभी आप संतुलन के स्तर पर जाते हो। पिरामिड में अगर आप तल की तरफ रहेंगे उतना ही भौतिक दुनिया के करीब होंगे और गुरुत्वाकर्षण के बल से उसी में बांध जायेंगे और यही बंधन और शक्ति आपको उच्च आयाम पर नहीं पहुंचने देते।

जब गुरु की सहायता से आप सिद्धियां प्राप्त करते हैं जो सृजन के लिए उपयोगी होती हैं। सेवा दान पुण्य और गुरु द्वारा मिला अनुभव ही आपको  ऊपर  के आयाम तक ले  जाता है जहां आप स्वयं को पिरामिड के सबसे ऊपर वाले स्थान पर पाते हो। ये कार्य आप अपनी इच्छा से कार्य हैं। योग के माध्यम से सही आवृति पर पहुंचे। याद रखें, आध्यात्मिकता का यह पिरामिड त्रिआयामी हैं जो संपूर्ण प्रकट सृष्टि को समग्रता में और उस से दूर के मार्ग को दर्शाता है।

अश्विनीजी गुरुजी ध्यान 

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