Sanwalia Seth mandir news : सांवलिया सेठ मंदिर का चढ़ावा कई देशों की अर्थव्यवस्था से भी बड़ा

Edited By Updated: 25 Jan, 2026 09:17 AM

sanwalia seth mandir news

भारत में आस्था केवल श्रद्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक शक्ति का भी बड़ा आधार बन चुकी है। देश में एक दर्जन से अधिक ऐसे मंदिर हैं, जिनका वार्षिक चढ़ावा दुनिया के कई छोटे देशों के सालाना बजट और जीडीपी से अधिक है।

उदयपुर (सुभाष शर्मा) : भारत में आस्था केवल श्रद्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक शक्ति का भी बड़ा आधार बन चुकी है। देश में एक दर्जन से अधिक ऐसे मंदिर हैं, जिनका वार्षिक चढ़ावा दुनिया के कई छोटे देशों के सालाना बजट और जीडीपी से अधिक है। इन्हीं में से एक है दक्षिणी राजस्थान का प्रसिद्ध कृष्णधाम- सांवलिया सेठ मंदिर, जो चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। श्रद्धालुओं की अपार आस्था के चलते इस मंदिर का वार्षिक चढ़ावा 500 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है।

सांवलिया सेठ मंदिर में देशज माह की अमावस्या से पूर्व चतुर्दशी को चढ़ावे के भंडारे खोले जाते हैं। मंदिर मंडल के पदाधिकारियों की मौजूदगी में दर्जनों कर्मचारी इस चढ़ावे की गिनती करते हैं, जो आमतौर पर चार से पांच दिन तक चलती है। मासिक औसत की बात करें तो भक्त 40 से 50 करोड़ रुपए नकद, इसके साथ ही 150 से 200 किलोग्राम चांदी और 500 ग्राम से अधिक सोना अर्पित कर रहे हैं। खास बात यह है कि सोना-चांदी के दाम बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि साल-दर-साल चढ़ावे में निरंतर वृद्धि हो रही है।

मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव बताते हैं कि इतने बड़े चढ़ावे से न केवल मंदिरों का संचालन होता है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्मशालाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जाता है। सांवलिया सेठ मंदिर आज श्रद्धा, समृद्धि और सामाजिक सहयोग का जीवंत प्रतीक बन चुका है। सांवलिया सेठ को मिलने वाला वार्षिक चढ़ावा दुनिया के कई स्वतंत्र देशों की कुल जीडीपी और सालाना बजट से अधिक है। इनमें तुवालु, नाउरू, पलाउ, किरीबाती, मार्शल आइलैंड्स और माइक्रोनेशिया शामिल हैं। जिनकी पूरी साल की अर्थव्यवस्था सांवलिया सेठ के एक वर्ष के चढ़ावे से भी कम मानी जाती है। 

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