Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Mar, 2026 02:02 PM

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय जिन्हें स्कंद, मुरुगन और सुब्रमण्यम भी कहा जाता है को समर्पित है।
Skand Shashthi 2026 : हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय जिन्हें स्कंद, मुरुगन और सुब्रमण्यम भी कहा जाता है को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी का यह पावन पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। तो आइए जानते हैं इसकी सही पूजन विधि और वे नियम जिनका पालन करना अनिवार्य है।
स्कंद षष्ठी की सरल और प्रभावशाली पूजन विधि
भगवान कार्तिकेय की कृपा पाने के लिए इस दिन विधि-विधान से पूजा करना फलदायी होता है:
शुद्धिकरण: व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और साफ वस्त्र (संभव हो तो पीले या लाल) धारण करें।
संकल्प: पूजा स्थल पर बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और अपनी मनोकामना (जैसे संतान प्राप्ति या कार्य में विजय) भगवान के समक्ष रखें।
स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ ही शिव-पार्वती की भी पूजा करें।
अभिषेक और श्रृंगार: भगवान स्कंद को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें कुमकुम, अक्षत, और चंदन का तिलक लगाएं।
विशेष अर्पण: कार्तिकेय जी को मोरपंख और नीले फूल बहुत प्रिय हैं, उन्हें अवश्य अर्पित करें। इसके अलावा फल और मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र और आरती: "ॐ स्कन्दाय नमः" या "ॐ शरवणभवाय नमः" मंत्र का जाप करें। अंत में स्कंद षष्ठी की कथा पढ़ें और आरती करें।

संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय
यदि आप संतान सुख के लिए यह व्रत कर रहे हैं, तो शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाएं और भगवान से अपनी झोली भरने की प्रार्थना करें। इस दिन कार्तिकेय जी के साथ माता पार्वती का भी विशेष ध्यान करना चाहिए।
स्कंद षष्ठी व्रत के जरूरी नियम
व्रत का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है:
ब्रह्मचर्य का पालन: इस व्रत के दौरान सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
वाणी पर संयम: किसी की निंदा न करें और न ही झूठ बोलें। क्रोध करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है।
तामसिक भोजन का त्याग: व्रत के दिन लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार के मांसाहार और नशीली चीजों का सेवन वर्जित है।
भूमि शयन: शास्त्रों के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन जमीन पर सोना शुभ माना जाता है।
परोपकार: इस दिन सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को फल या अन्न का दान करना चाहिए।

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