हिंदू धर्म में क्यों हर पूजा में इस्तेमाल होते हैं चावल और हल्दी?

Edited By Updated: 23 Dec, 2021 06:25 PM

use of rice and haldi in puja

सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक प्रकार की पूजा आदि में अनेक प्रकार की पूजा सामग्री का उपयोग होता है। जिसमें से कुछ चीज़ें ऐसी हैं, जो सामान्य पाई जाती हैं। हम बात कर रहे हैं, चावल और हल्दी।

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सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक प्रकार की पूजा आदि में अनेक प्रकार की पूजा सामग्री का उपयोग होता है। जिसमें से कुछ चीज़ें ऐसी हैं, जो सामान्य पाई जाती हैं। हम बात कर रहे हैं, चावल और हल्दी। धार्मिक मान्यता है कि लगभग प्रत्येत पूजा व धार्मिक कार्य में इन दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। परंतु इनका प्रयोग क्यों इतना जरूरी माना जाता है इस बार में बहुत कम लोग जानते हैं। तो आइए जानते हैं कि हिंदू धर्म में होने वाली इन दोनों चीज़ों का इतना महत्व क्यों है। 

सबसे पहले बात करते हैं कि चावलों की। कई लोग चावल को अक्षत भी कहते हैं। आपको बता दें कि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा न हो। इसका रंग सफेद होता है। पूजन में अक्षत का उपयोग अनिवार्य है। अक्षत न हो तो पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। दरअसल अक्षत पूर्णता का प्रतीक है। यानि कि ये टूटा हुआ नहीं होता है। अत: पूजा में अक्षत चढ़ाने की मान्यता ये है कि हमारी पूजा अक्षत की तरह पूर्ण हो।

अन्न में श्रेष्ठ होने के कारण भगवान को चढ़ाते समय ये भाव रहता है कि जो कुछ भी अन्न हमें प्राप्त होता है वह भगवान की कृपा से ही मिलता है। अत: हमारे अंदर ये भावना भी बनी रहे। वहीं इसका सफेद रंग शांति का प्रतीक है। यानि हमारे प्रत्येक कार्य की पूर्णता ऐसी हो कि उसका फल हमें शांति प्रदान करे। तो इसीलिए पूजन में अक्षत एक अनिवार्य सामग्री है। भगवान को चावल अर्पित करते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि चावल टूटे हुए न हों। अक्षत पूर्णता का प्रतीक है अत: सभी चावल अखंडित होने चाहिए। चावल साफ और स्वच्छ होने चाहिए।

अब बात करते हैं हल्दी की- 
आप में से बहुत से लोग ये तो जानते होते हैं कि हल्दी एक विशेष प्रकार की औषधि है और इसमें दैवीय गुण भी होते हैं। हिन्दू धर्म में हल्दी को शुभ और मंगल लाने वाला माना जाता है। ये न सिर्फ खाने के स्वाद को बढाती है बल्कि जीवन में सम्पन्नता भी लाती है।. मुख्य रूप से हल्दी विषरोधक होती है और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है इसीलिए हल्दी का प्रयोग हवन और औषधियों में भी किया जाता है। विवाह में भी वर-वधु को हल्दी चढ़ाने के पीछे भी यही महत्व है कि उन्हें बाहरी बाधाओं से बचाया जाए साथ ही सेहत और सुंदरता के लाभ भी उन्हें मिले।

वास्तव में हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है। पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है। इसी तरह हल्दी का दान करना शुभ माना जाता है। इससे कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है। गुरु ग्रह में अनुकूलता आती है। पूजा के बाद माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से विवाह संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है। घर की बाउंड्री की दीवार पर अगर हल्दी की रेखा बना दी जाए तो घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है। इसके अलावा नहाते समय अगर पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर नहाया जाए तो यह शारीरिक और मानसिक शुद्धता देती है। करियर में सफलता के लिए भी यह प्रयोग अचूक है। अगर नकारात्मकता को दूर रखना चाहते हैं तो हल्दी की गांठ पर मौली लपेट कर सिरहाने रखें। विवाह संबंधी रुकावटें दूर करने के लिए हर गुरुवार गणेश जी को एक चुटकी हल्दी चढ़ाएं। सूर्य को हल्दी मिला जल चढ़ाने से कन्या की शादी मनचाहे वर से होती है।
 

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