Edited By Niyati Bhandari,Updated: 04 Apr, 2026 10:43 AM

Vaishakh Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित होता है, जिन्हें भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है। वैशाख माह की कालाष्टमी को लेकर इस बार लोगों में असमंजस है कि व्रत 9...
Vaishakh Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित होता है, जिन्हें भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है। वैशाख माह की कालाष्टमी को लेकर इस बार लोगों में असमंजस है कि व्रत 9 अप्रैल को रखा जाए या 10 अप्रैल को। ऐसे में पंचांग के अनुसार सही तिथि और मुहूर्त जानना जरूरी है।

कालाष्टमी 2026 की सही तिथि
पंचांग के अनुसार: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 9 अप्रैल 2026, रात 09:19 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात 11:15 बजे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी की पूजा निशा काल (रात्रि) में की जाती है। इसलिए इस बार 9 अप्रैल 2026 को कालाष्टमी व्रत रखना और पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
निशा काल पूजा (मुख्य मुहूर्त): 9 अप्रैल की रात (अष्टमी तिथि आरंभ के बाद)
इस समय श्रद्धा भाव से की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

Kalashtami Vrat puja vidhi कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
रात में काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
सरसों का तेल, काले तिल, फूल और नारियल अर्पित करें।
दीपक जलाकर आरती करें।
भैरव चालीसा या मंत्रों का जाप करें।
काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
अंत में प्रसाद वितरण कर व्रत का पारण करें।

कालाष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काल भैरव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। शत्रुओं से रक्षा मिलती है।
मानसिक तनाव कम होता है। जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता आती है।
काल भैरव को समय का स्वामी माना जाता है, इसलिए उनकी कृपा से जीवन में अनुशासन और सफलता प्राप्त होती है।
वैशाख कालाष्टमी 2026 में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति जरूर है, लेकिन पंचांग के अनुसार 9 अप्रैल को व्रत और पूजा करना सबसे शुभ रहेगा। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
