Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Mar, 2026 03:35 PM

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत गौरवशाली माना जाता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भक्ति और शक्ति के मिलन का पर्व है, क्योंकि इसी दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव भी पूरे हर्षोल्लास के...
Chaitra Purnima 2026 Date : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत गौरवशाली माना जाता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भक्ति और शक्ति के मिलन का पर्व है, क्योंकि इसी दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा की चांदनी न केवल प्रकृति को सराबोर करेगी, बल्कि भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार भी खोलेगी। चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होकर जब आकाश में उदित होगा, तब दान-पुण्य और पवित्र स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। तो आइए जानते हैं चैत्र मास की पूर्णिमा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में-
चैत्र पूर्णिमा 2026 की सही तिथि
वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि एक रात पहले से ही शुरू हो जाती है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजन 2 अप्रैल को ही करना शास्त्र सम्मत होगा।
पूजा और स्नान के शुभ मुहूर्त
वैदिक ज्योतिष और पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि का आगमन 01 अप्रैल को प्रातः काल 07:06 बजे से होने जा रहा है। पूर्णिमा का यह पावन काल अगले दिन, यानी 02 अप्रैल की सुबह 07:41 बजे तक बना रहेगा। शास्त्रों में उदयातिथि के महत्व को देखते हुए, चैत्र पूर्णिमा का पर्व 02 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा का महत्व
हनुमान जन्मोत्सव: इसी दिन भगवान शिव के 11वें अवतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
सत्यनारायण कथा: बहुत से श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त सत्यनारायण की कथा सुनते हैं, जिससे घर में सुख-शांति आती है।
चंद्र देव की पूजा: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। मानसिक शांति और कुंडली में चंद्र दोष को दूर करने के लिए इस दिन चंद्र दर्शन और अर्घ्य का विधान है।
दान का फल: चैत्र पूर्णिमा पर अन्न, जल और वस्त्र का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

पूजन विधि और नियम
स्नान: सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी में या घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
संकल्प: स्वच्छ वस्त्र धारण कर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
अर्घ्य: रात के समय चंद्रमा को दूध और जल का अर्घ्य दें।
सात्विकता: इस दिन पूरी तरह सात्विक भोजन ग्रहण करें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।

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