Vamana Dwadashi 2021: जानिए, वामन पूजा का महत्व व कुछ खास उपाय

Edited By Updated: 21 Jul, 2021 12:49 PM

vamana dwadashi 2021

आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भी वामन द्वादशी का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना की जाती

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आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भी वामन द्वादशी का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना की जाती है। बता दें इस तिथि के अलावा वामन द्वादशी का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन वामन द्वादशी का व्रत रखा जाता हैै। आज 21 जुलाई को वामन द्वादशी का व्रत रखा जा रहा है। तो आइए इसी खास मौके पर जानतें हैं शास्त्रों व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार क्या है इस दिन का महत्व और साथ ही जानें कि इस दिन कौन से उपाय करने से क्या फल मिलता है। 

जैसे कि उपरोक्त भी हम ने आपको जानकारी दी है, इस दिन श्री हरि विष्णु के वामन अवतार की पूजा अर्चना की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आषाढ़ माह के अंतिम पांच दिनों में वामन पूजा करने का विधान है।  

इस तिथि पर भगवान वामन और राजा बलि की कथा सुनने का अधिक महत्व माना जााता है। तो वहीं बलि के राज्य केरल में इस दिन के साथ ही ओणम उत्सव की शुरुआत होती है।  

भगवान वामन की कृपा पाने के लिए इस दिन भगवान वामन को शहद चढ़ाई जाती है। तो वहीं इसका सेवन करने से व्यक्ति को निरोगी काया प्राप्त होती है। 

जिस किसी व्यक्ति के जीवन में अधिक गृहकलेश हो तो इस दिन यानि वामन द्वादशी के दिन वामन देवता के समक्ष कांसे के बर्तन में घी का दीपक जलाना चाहिए।

नौकरी मिलने में परेशानी हो या व्यापार में किसी तरह की रुकावट आ रही हो तो वामन द्वादशी के दिन भगवान वामन को नारियल पर यज्ञोपवीत लपेटकर अर्पित करना चाहिए।

इस दिन भागवत पुराण कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

इस दिन भगवान वामनदेव की पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करने के बाद चावल, दही इत्यादि वस्तुओं का यथाशक्ति अनुसार दान करना भी बेहद ही शुभ माना जाता है।

भगवान वामन की मूर्ति या चित्र की विधि वत पूजा करें। अगर वामन भगवान की मूर्ति है तो दक्षिणावर्ती शंख में गाय का दूध लेकर इस प्रतिमा काा अभिषेक करें। पूजन के पश्चात कथा सुनें और बाद में आरती करें। 

अंत में गरीबों को या ब्राह्माण को चावल, दही और मिश्री का दान करें। 

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