Navratri 2026 Kanya Pujan : कब से शुरू हुई कन्या पूजन की परंपरा ? जानिए 2 से 10 साल की कन्याओं का महत्व

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 01:28 PM

navratri 2026 kanya pujan

नवरात्रि के नौ दिनों की अखंड साधना, उपवास और मंत्रोच्चार का पूर्ण फल तब तक प्राप्त नहीं होता, जब तक घर की चौखट पर नन्हीं देवियों के चरण न पड़ें। हिंदू धर्म में कन्या पूजन केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति के सबसे पवित्र और...

Navratri 2026 Kanya Pujan : नवरात्रि के नौ दिनों की अखंड साधना, उपवास और मंत्रोच्चार का पूर्ण फल तब तक प्राप्त नहीं होता, जब तक घर की चौखट पर नन्हीं देवियों के चरण न पड़ें। हिंदू धर्म में कन्या पूजन केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति के सबसे पवित्र और निष्पाप स्वरूप की आराधना का महापर्व है। चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी के दिन जब श्रद्धालु कन्याओं के पैर पखारते हैं, तो वह दृश्य साक्षात देवलोक की अनुभूति कराता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि हाथ जोड़कर छोटी बालिकाओं के सामने शीश नवाने की यह परंपरा आखिर कब और क्यों शुरू हुई। पुराणों में क्यों कहा गया है कि 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन ही श्रेष्ठ है। दरअसल, शास्त्र बताते हैं कि हर उम्र की कन्या माँ दुर्गा के एक विशेष स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है। तो आइए जानते हैं कन्या पूजन का पौराणिक इतिहास और विभिन्न आयु की कन्याओं के पूजन से मिलने वाले अद्भुत ज्योतिषीय लाभ के बारे में-

Navratri 2026 Kanya Pujan

कब और कैसे शुरू हुई कन्या पूजन की परंपरा ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन की जड़ें त्रेता और द्वापर युग से जुड़ी हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि जब देवताओं पर असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब मां शक्ति ने एक छोटी कन्या का रूप धरकर असुरों का संहार किया था।

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, स्वयं देवी भगवती ने कहा है कि मैं जितनी प्रसन्न कन्या पूजन से होती हूं, उतनी हवन या जप से भी नहीं। माना जाता है कि महाशक्ति की पूर्ण कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी सबसे निर्मल अभिव्यक्ति, यानी 'बालिका' का पूजन अनिवार्य है। यह परंपरा सदियों से नारी शक्ति के सम्मान और समाज में उनके ऊंचे स्थान को दर्शाने के लिए चली आ रही है।

Navratri 2026 Kanya Pujan

कन्याओं की आयु और उनका आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं के पूजन का विधान है। आयु के अनुसार उनके पूजन का फल भी अलग-अलग बताया गया है।

2 वर्ष की कन्या (कुमारी): इनके पूजन से दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।

3 वर्ष की कन्या (त्रिमूर्ति): त्रिमूर्ति के पूजन से धन, धान्य और परिवार में खुशहाली आती है।

4 वर्ष की कन्या (कल्याणी): इनकी पूजा से विद्या, विजय और राजसुख की प्राप्ति होती है।

5 वर्ष की कन्या (रोहिणी): रोहिणी स्वरूप की पूजा करने से भक्त के सभी पुराने रोग और कष्ट मिट जाते हैं।

6 वर्ष की कन्या (कालिका): शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता के लिए कालिका स्वरूप का पूजन श्रेष्ठ है।

7 वर्ष की कन्या (चंडिका): ऐश्वर्य और मान-सम्मान पाने के लिए चंडिका स्वरूप की अर्चना की जाती है।

8 वर्ष की कन्या (शाम्भवी): इनके पूजन से अटके हुए कार्य सिद्ध होते हैं और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है।

9 वर्ष की कन्या (दुर्गा): साक्षात दुर्गा स्वरूप मानी जाने वाली इन कन्याओं के पूजन से कठिन से कठिन बाधाएं दूर होती हैं।

10 वर्ष की कन्या (सुभद्रा): सुभद्रा स्वरूप का पूजन मोक्ष और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।

Navratri 2026 Kanya Pujan

कैसे करें विधि-विधान से पूजन ?
स्वच्छता: सबसे पहले कन्याओं के पैर धोकर उन्हें साफ आसन पर बिठाएं।

तिलक और अक्षत: उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें।

भोजन: सात्विक भोजन (हलवा, पूरी, चने) का भोग लगाएं।

उपहार और दक्षिणा: भोजन के बाद सामर्थ्य अनुसार फल, श्रृंगार सामग्री या दक्षिणा दें।

आशीर्वाद: अंत में उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

Navratri 2026 Kanya Pujan

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!