Who is Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati : कौन हैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ? जानें, योगी से लेकर अखिलेश यादव तक की टकराहट की कहानी

Edited By Updated: 20 Jan, 2026 01:43 PM

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Who is Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati : प्रयागराज के संगम पर मौनी अमावस्या के अवसर पर जहां करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच तीखा विवाद...

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Who is Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati :
प्रयागराज के संगम पर मौनी अमावस्या के अवसर पर जहां करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच तीखा विवाद देखने को मिला। परंपराओं, धार्मिक अधिकारों और कथित वीआईपी व्यवस्था को लेकर उपजा यह टकराव अब राजनीतिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

शंकराचार्य और प्रशासन के बीच टकराव कैसे बढ़ा
मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने लगभग 200 अनुयायियों के साथ रथ और पालकी के जरिए संगम स्नान के लिए रवाना हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें एक बैरियर पर रोक दिया। पुलिस प्रशासन का कहना था कि मौनी अमावस्या पर किसी भी प्रकार की वीआईपी आवाजाही पर रोक लगाई गई थी।

आरोप है कि इसके बावजूद शंकराचार्य ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति बिगड़ गई और करीब तीन घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दावा है कि उनके समर्थकों के साथ प्रशासन ने बल प्रयोग किया और उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया और कहा कि सही-गलत का फैसला समय करेगा।

उमाशंकर पांडे से शंकराचार्य बनने तक की यात्रा
आज अपने मुखर और सख्त रुख के लिए पहचाने जाने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम उमाशंकर पांडे है। प्रारंभिक शिक्षा गांव में कक्षा छह तक हुई, इसके बाद वे अपने पिता के साथ गुजरात चले गए।
वहीं उनकी मुलाकात काशी के संत रामचैतन्य से हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे संन्यास मार्ग पर अग्रसर हुए। काशी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में रहकर उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और गुरु के प्रिय शिष्यों में गिने जाने लगे। वर्ष 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के देहांत के बाद उन्हें ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया गया।

आंदोलनों और विवादों से रहा है गहरा नाता
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इससे पहले भी कई आंदोलनों और विवादों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। वर्ष 2008 में गंगा की स्वच्छता और संरक्षण के लिए काशी में 112 दिनों का अनशन कर वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए। 2015 में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर हुए घटनाक्रम में संतों पर हुए लाठीचार्ज में वे घायल हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनसे क्षमा मांगी थी। 2018 में काशी कॉरिडोर निर्माण के दौरान पुराने मंदिरों को हटाए जाने के विरोध में उन्होंने खुलकर मोर्चा संभाला। वहीं 2022 में ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग की पूजा का ऐलान कर उन्होंने प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया था। मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में हुआ ताजा विवाद एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ले आया है और धार्मिक परंपराओं व प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन पर बहस को तेज कर गया है।

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