Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Apr, 2026 01:17 PM

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कर नीतियों को लेकर एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। ऑक्सफैम के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच भारत को IMF की ओर से सबसे ज्यादा “प्रतिगामी कर” (Regressive Tax) से जुड़ी सिफारिशें मिलीं। यह रिपोर्ट...
नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कर नीतियों को लेकर एक नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। ऑक्सफैम के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच भारत को IMF की ओर से सबसे ज्यादा “प्रतिगामी कर” (Regressive Tax) से जुड़ी सिफारिशें मिलीं। यह रिपोर्ट वॉशिंगटन में IMF और विश्व बैंक की वसंत बैठकों से पहले जारी की गई है, जिसमें वैश्विक कर सलाह के पैटर्न पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, IMF अमीर देशों और विकासशील देशों के साथ अलग-अलग रवैया अपनाता नजर आ रहा है।
ऑक्सफैम के अध्ययन में 125 देशों को दी गई IMF की 1,049 कर सिफारिशों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों को दी गई करीब 59% कर सलाह प्रतिगामी रही, यानी ऐसी नीतियां जिनका बोझ गरीब और मध्यम वर्ग पर ज्यादा पड़ता है। वहीं, उच्च आय वाले देशों को दी गई 52% सिफारिशें प्रगतिशील थीं, जिनमें अमीर वर्ग पर ज्यादा कर लगाने की बात होती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल सिफारिशों में से केवल 3% ही ऐसी थीं जो संपत्ति कर या पूंजीगत लाभ जैसे प्रगतिशील उपायों से जुड़ी थीं। जबकि 2020 के बाद दुनिया भर में अरबपतियों की संपत्ति में 81% तक की बढ़ोतरी हुई है। विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों को IMF से सबसे ज्यादा प्रगतिशील कर सलाह मिली, जबकि भारत को सबसे अधिक प्रतिगामी सुझाव दिए गए। दक्षिण एशिया क्षेत्र को भी “सबसे अधिक प्रतिगामी” कर सलाह वाला क्षेत्र बताया गया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की कर नीतियां विकासशील देशों में असमानता को और बढ़ा सकती हैं, क्योंकि इनका बोझ मुख्य रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है, जबकि अमीर वर्ग अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है। ऑक्सफैम ने IMF पर “दोहरा मानदंड” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जहां एक ओर वह अमीर देशों को असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर सलाह देता है, वहीं दूसरी ओर गरीब देशों के लिए ऐसी नीतियां सुझाता है जो असमानता बढ़ा सकती हैं।