'गली बॉय' के 7 साल : एमसी शेर और सफीना आज भी हैं युवा पीढ़ी की आवाज़

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 07:04 PM

7 years of gully boy mc sher and safeena remain film cultural powerhouses

'गली बॉय' को रिलीज़ हुए 7 साल हो चुके हैं और इन 7 सालों में यह फिल्म एक हिट के साथ एक मील का पत्थर बन चुकी है। हालांकि कहानी की धुरी भले ही मुराद का अंडरडॉग सफ़र रहा हो, लेकिन दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी एमसी शेर और सफीना इन दो किरदारों ने,...

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। 'गली बॉय' को रिलीज़ हुए 7 साल हो चुके हैं और इन 7 सालों में यह फिल्म एक हिट के साथ एक मील का पत्थर बन चुकी है। हालांकि कहानी की धुरी भले ही मुराद का अंडरडॉग सफ़र रहा हो, लेकिन दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी एमसी शेर और सफीना इन दो किरदारों ने, यानी सिद्धांत चतुर्वेदी और आलिया भट्ट ने।

जब सिद्धांत चतुर्वेदी, एमसी शेर के किरदार में आए, तो उनके साथ एक ख़ामोश लेकिन असरदार करिश्मा था। शेर सबसे ऊँची आवाज़ वाला किरदार नहीं था, फिर भी हर फ्रेम में उसकी मौजूदगी महसूस होती थी। मुराद के मेंटर और दोस्त के रूप में वह भरोसे का प्रतीक था, ऐसा भरोसा जो तक़दीर बदल सकता है। सिद्धांत की संयमित अदाकारी, संतुलित संवाद अदायगी, सधा हुआ बॉडी लैंग्वेज और अडिग आत्मविश्वास, एमसी शेर को फिल्म के सबसे चर्चित किरदारों में ले आता है। हाई-एनर्जी पलों से भरी फिल्म में शेर की शांति और अधिकारपूर्ण ठहराव,शोर को चीर देता है। यही वजह है कि कई दर्शकों के लिए सिद्धांत न सिर्फ  कहानी की भावनात्मक रीढ़ बन गए, बल्कि अपने ब्रेकआउट परफॉर्मेंस से वे रातों-रात चर्चा का विषय भी बन गए।

सिद्धांत चतुर्वेदी द्वारा निभाए गए किरदार एमसी शेर के विपरीत दूसरी तरफ भावनात्मक पैमाने के दूसरे सिरे पर थीं तेज़, खामियों से भरी और न भूलनेवाली सफीना यानी आलिया भट्ट। सफीना के रूप में आलिया भट्ट ने एक संभावित पारंपरिक प्रेमिका के किरदार को हालिया मेनस्ट्रीम सिनेमा के सबसे लेयर्ड कैरेक्टर्स में बदल दिया था। सफीना महत्वाकांक्षी थी, बेबाक थी और अपनी भावनाओं को कभी नहीं दबाती थी। वह जितनी शिद्दत से प्यार करती है, उतनी ही ताक़त से लड़ती भी है और हाशिए पर नहीं रहती। सफीना के रूप में आलिया उग्रता और नाज़ुकता के बीच संतुलन साधती नज़र आती हैं. यही वजह है कि आज भी युवा दर्शकों को उसमें अपनी भावनात्मक ईमानदारी और महत्वाकांक्षा की झलक दिखाई देती है।

अगर यह कहें तो गलत नहीं होगा कि एमसी शेर और सफीना साथ मिलकर एक पीढ़ी के दो निर्णायक ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते हैं, जिनमें एक है मेंटरशिप के साथ खुद का गढ़ा हुआ आत्मविश्वास और दूसरी तरफ है भावनात्मक पारदर्शिता और तीखी व्यक्तिगत पहचान। इन दोनों किरदारों की कहानियाँ सिर्फ़ मुराद के सफ़र का सहारा नहीं बनती, बल्कि उसे और ऊँचाई देती हैं, जिससे फिल्म का भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

यही वजह है कि फिल्म रिलीज़ के सात साल बाद भी 'गली बॉय' के डायलॉग्स दोहराए जाते हैं, सीन फिर-फिर देखे जाते हैं। पॉप कल्चर की यादों में जिंदा इन दोनों किरदारों ने 'गली बॉय' के साथ एक आंदोलन को जन्म दिया था, क्योंकि एमसी शेर और सफीना, इन दोनों किरदारों के दिलों में आग थी। यही वजह है कि आज भी उनकी परफॉर्मेंस एक पूरे दौर की आत्मा को परिभाषित करती हैं।

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