Char Yaar Review: 10 लाख रुपये के लिए जुर्म की दुनिया में उतरे चार दोस्तों की कहानी, जानें कैसी है सीरीज

Edited By Updated: 23 Oct, 2026 11:44 AM

char yaar review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज चार यार

सीरीज: चार यार (chaar yaar)
कलाकार: दिब्येंदु भट्टाचार्य (Dibyendu Bhattacharya), चंकी पांडे (Chunky Panday), राजेश तैलंग (Rajesh Tailang), पुरव झा (Purav Jha) और साई ताम्हणकर (Sai Tamhankar)
निर्देशक: विनय वैकुल (Vinay Waikul)
रेटिंग: 3*

चार यार: प्राइम वीडियो इस हफ्ते फिर हाजिर हो गया है अपने एक नए शो के साथ जहां क्राइम और थ्रिलर का डोज है हम बात कर रहे हैं। विनय वैकुल के निर्देशन में बनी सीरीज चार यार जिसमें दिब्येंदु भट्टाचार्य, चंकी पांडे, राजेश तैलंग, पुरव झा और साई ताम्हणकर अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। चार यार जो चार मिडिल क्लास दोस्तों की कहानी है। सीरीज में धोखे, चोरी और थ्रिल का मेल देखने को मिल रहा है आइए जानते हैं कैसी है सीरीज चार यार।

कहानी
2000 के शुरुआती दौर में मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच चार दोस्त जय, टोनी, साहिल और समीर बेहतर भविष्य के सपने देखते हैं। मिडिल क्लास परिवारों से ताल्लुक रखने वाले इन दोस्तों के सामने परिवार की जिम्मेदारियों और अपनी जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है। इसी बीच 10 लाख रुपये हासिल करने की चाहत उन्हें ऐसे रास्ते पर ले जाती है, जहां से उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। पैसों के इंतजाम में चारों धीरे-धीरे जुर्म की दुनिया में कदम रख देते हैं और मुंबई के बड़े गैंगस्टर इम्तियाज के जाल में फंस जाते हैं। देखते ही देखते वे कार चोरी के काले कारोबार का अहम हिस्सा बन जाते हैं, जहां हर कदम पर उनके सामने नए खतरे और मुश्किलें खड़ी होती हैं। अब वो कौन सी मुश्किलें हैं और क्या वो जुर्म की दुनिया से बाहर आ पाएंगे ये जानने के लिए आपको देखनी होगी सीरीज।

निर्देशन
विनय वैकुल ने ‘चार यार’ के जरिए क्राइम और थ्रिलर को अच्छे अंदाज में पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। सीरीज की कहानी में अपराध की दुनिया, धोखे और चोरी के साथ मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी को भी बखूबी दिखाया गया है। खास बात यह है कि कहानी सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रहती, बल्कि चार मिडिल क्लास दोस्तों की मजबूरियों, उनकी जरूरतों और बेहतर जिंदगी पाने की चाहत को भी सामने रखती है। इसके साथ ही हंसी का भी डोज है। कहानी को बेवजह खींचने के बजाय घटनाओं को सही तरीके से आगे बढ़ाया गया है, जिससे दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहती है। 


अभिनय
पुरव झा ने अपने अभिनय से प्रभावित किया है। उन्होंने अपने किरदार को सहजता के साथ निभाया है और कई मौकों पर उनकी मौजूदगी कहानी में जान डालती है। वहीं, दिब्येंदु भट्टाचार्य अपने अनुभव और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से कहानी के क्राइम वाले पहलू को मजबूती देते हैं। चंकी पांडे अपने किरदार में अलग अंदाज लेकर आते हैं, जबकि राजेश तैलंग का अभिनय कहानी के गंभीर माहौल के साथ मेल खाता है। साई ताम्हणकर भी अपने किरदार को सहजता से निभाती हैं और कहानी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं।

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