Edited By Manisha,Updated: 25 Oct, 2026 04:28 PM

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज नाइन टू फाइव
सीरीज- नाइन टू फाइव (Nine To Five)
कलाकार: प्रीत कमानी (Prit Kamani), राजेश कुमार (Rajesh Kumar), भाग्यश्री लिमये (Bhagyashree Limaye), अजितेश गुप्ता (Ajitesh Gupta), तान्या शर्मा (Tanya Sharma)
निर्देशक: व्योम छराया (Vyom Charaya)
प्लेटफॉर्म: Alright! YouTube Channel
रेटिंग: 3.5*
Nine To Five: जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो हर बार सफलता के बेहद करीब पहुंचते हैं, लेकिन आखिरी पड़ाव पर पीछे रह जाते हैं। कभी पढ़ाई में दूसरा स्थान, कभी प्यार में अधूरी कामयाबी तो कभी करियर में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद। वेब सीरीज ‘नाइन टू फाइव’ का अनुज भी ऐसा ही एक युवा है, जिसकी जिंदगी में ‘ऑलमोस्ट’ यानी लगभग शब्द ने जैसे स्थायी जगह बना ली है। एक स्टार्टअप में नौकरी मिलने के बाद उसे लगता है कि अब शायद उसकी जिंदगी बदलने वाली है, लेकिन आगे बढ़ने की कोशिश में उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रस्क मीडिया के निर्माण और व्योम छराया के निर्देशन में बनी यह सीरीज युवाओं के करियर, रिश्तों और खुद को साबित करने की कोशिशों को दिलचस्प अंदाज में पेश करती है। आइए, जानते हैं कैसी है ‘नाइन टू फाइव’।

कहानी
कहानी की शुरुआत अनुज (प्रीत कमानी) के नौकरी के इंटरव्यू से होती है, जहां उसे किवी एप नाम के स्टार्टअप में नौकरी मिल जाती है। अनुज को उसका दोस्त सूजल ‘ऑलमोस्ट कुमार’ कहता है, क्योंकि वह जिंदगी में हर बार सफलता के करीब पहुंचकर भी पीछे रह जाता है। नई नौकरी से उसे उम्मीद होती है कि अब उसकी जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन जल्द ही उसे घर से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऑफिस में उसकी मुलाकात यशस्विनी उर्फ यश (भाग्यश्री लिमये) से होती है और इस दौरान कंपनी के मार्केटिंग व स्ट्रैटेजी हेड दीपक (राजेश कुमार) उसे समझाते हैं कि सफलता के करीब पहुंचना भी एक उपलब्धि है। उनकी बातों से प्रेरित होकर अनुज अपनी परेशानियों को नए नजरिये से देखने की कोशिश करता है। इसी बीच उसकी जिंदगी में प्यार भी दस्तक देता है, लेकिन तीसरे एपिसोड में कुछ ऐसे डिजाइन और कागजात सामने आते हैं, जो कहानी में नया मोड़ ले आते हैं। इन कागजात का राज क्या है, यह जानने के लिए सीरीज देखनी होगी।

अभिनय
प्रीत कमानी सीरीज के मुख्य किरदार अनुज के रूप में सहज और प्रभावशाली नजर आते हैं। वह एक ऐसे युवा की बेचैनी, असुरक्षा और महत्वाकांक्षा को अच्छी तरह पेश करते हैं, जो लगातार खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है। उनके अभिनय में एक आम युवक की उलझनें और आगे बढ़ने की जिद दिखाई देती है, जिससे दर्शक आसानी से जुड़ सकते हैं। भाग्यश्री लिमये यश के किरदार में आत्मविश्वास और सहजता लेकर आती हैं। उनकी संवाद अदायगी और चेहरे के भाव किरदार को प्रभावी बनाते हैं। वहीं, राजेश कुमार दीपक के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। उनका सहज अंदाज, हास्य से भरपूर संवाद और परिस्थितियों को समझाने का तरीका सीरीज को मनोरंजक बनाता है। खास तौर पर अनुज को जिंदगी के प्रति सकारात्मक नजरिया देने वाले दृश्यों में उनका अभिनय अच्छा लगता है। तान्या शर्मा भी अपनी भूमिका में सहज दिखाई देती हैं, जबकि अन्य कलाकार कहानी को आगे बढ़ाने में सहयोग करते हैं। कुल मिलाकर, कलाकारों का अभिनय सीरीज की कहानी को विश्वसनीय और दर्शकों के करीब बनाता है।

निर्देशन
सिद्धार्थ तिवारी और व्योम छराया की लेखनी का सबसे खास पहलू ‘ऑलमोस्ट कुमार’ की अवधारणा है। यह विचार सरल होने के बावजूद जिंदगी में बार-बार सफलता के करीब पहुंचकर पीछे रह जाने की भावना को प्रभावी ढंग से सामने लाता है। निर्देशक व्योम छराया ने अनुज के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को आपस में जोड़ते हुए कहानी को सहज और मनोरंजक बनाए रखा है। ऑफिस की चुनौतियों के साथ हास्य, रोमांस और भावनात्मक पहलुओं को शामिल करने से कहानी केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रिश्तों और व्यक्तिगत उम्मीदों को भी छूती है। सीरीज की खासियत यह है कि इसका नायक कोई असाधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि एक आम युवा है, जिसकी परेशानियां और सपने आज की पीढ़ी से जुड़ते हैं। संवाद भी कहानी को मजबूती देते हैं और कई जगह जिंदगी को देखने का नया नजरिया पेश करते हैं। हालांकि कहानी का मुख्य विचार सरल है, लेकिन उसे पेश करने का तरीका इसे दिलचस्प बनाता है। कुल मिलाकर, ‘नाइन टू फाइव’ अपनी सहज कहानी, स्वाभाविक अभिनय और सकारात्मक संदेश के कारण देखने लायक सीरीज है। यह याद दिलाती है कि कामयाबी का मतलब हमेशा पहला स्थान हासिल करना नहीं होता; कई बार मंजिल के करीब पहुंचना भी आगे बढ़ने की दिशा में एक अहम कदम होता है।