Review: सादगी में छिपा पंकज त्रिपाठी का दम – क्रिमिनल जस्टिस ने फिर दिल जीता

Updated: 29 May, 2025 06:19 PM

criminal justice season 4 review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है पंकज त्रिपाठी की सीरीज क्रिमिनल जस्टिस

सीरीज: क्रिमिनल जस्टिस सीजन 4 (Criminal Justice Season 4) 
निर्देशक: रोहन सिप्पी (Rohan Sippy)
कलाकार: पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi), सुरवीन चावला (Surveen Chawla), जीशान आयूब (Zeeshan Ayub), आशा नेगी (Asha Negi), खुशी भारद्वाजKhushi Bhardwaj, खुशबू आत्रेKhushboo Atre
ओटीटी प्लेटफार्म: जियोहॉटस्टार (jiohotstar)
रेटिंग-3.5*

Criminal Justice Season 4: क्रिमिनल जस्टिस वापस आ चुकी है और इस बार केस से ज़्यादा किरदार मारक हैं। एक तरफ पंकज त्रिपाठी की सादी लेकिन धारदार परफॉर्मेंस, दूसरी तरफ एक उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री – जो आपको एपिसोड दर एपिसोड चौंकाती है। मोहम्मद जिशान अयूब, सुरवीन चावला और आशा नेगी जैसे दमदार कलाकारों के साथ इस बार मामला पर्सनल भी है और इमोशनल भी। और जब डायरेक्शन हो रोहन सिप्पी का, तो बात बनती है! आइए जानते हैं कैसी है सीरीज।

कहानी
इस बार कहानी घूमती है डॉक्टर राज नागपाल के इर्द-गिर्द – एक ऐसा डॉक्टर जो अपनी पत्नी से अलग रह रहा है, लेकिन दोनों एक ही बिल्डिंग में आमने-सामने रहते हैं। उनकी एक स्पेशल चाइल्ड बेटी है, जिसकी देखभाल के लिए रौशनी नाम की एक नर्स आती है। नर्स और डॉक्टर के बीच रिश्ता बनता है, लेकिन अचानक रौशनी की हत्या हो जाती है। अब केस बनता है और उसमें आते हैं हमारे पुराने दोस्त – वकील माधव मिश्रा यानी पंकज त्रिपाठी। वो इस केस की तह तक जाते हैं और आपको हर एपिसोड में ये जानने की चाहत बनी रहती है – आखिर कातिल कौन है?

एक्टिंग 
सीरीज की जान हैं पंकज त्रिपाठी – सादगी में जो गहराई लाते हैं, वही इसे खास बनाती है। ना चीख, ना चिल्लाहट – सिर्फ उनके वन लाइनर्स और बॉडी लैंग्वेज ही काफी है दर्शक को जोड़े रखने के लिए।

मोहम्मद जिशान अयूब ने अपने किरदार को संजीदगी से निभाया, लेकिन उनका कैरेक्टर ज्यादा एक्सप्रेशन की गुंजाइश नहीं देता। सुरवीन चावला के किरदार में शेड्स हैं, और वो उसे अच्छे से निभाती हैं।

आशा नेगी एक शानदार सरप्राइज़ हैं – भले उनका किरदार जल्दी मर जाता है, लेकिन उनके फ्लैशबैक सीन कमाल के हैं। वहीं श्वेता बासु प्रसाद, मीता वशिष्ठ और कल्याणी मूले जैसे सपोर्टिंग एक्टर्स भी अपना बेस्ट देते हैं।

राइटिंग और डायरेक्शन 
हरमन वडाला, संदीप जैन और समीर मिश्रा की राइटिंग साफ-सुथरी है – कोई झोलझाल नहीं, कोई ओवरड्रामा नहीं। यही वजह है कि ये शो ज़्यादा रियल लगता है। रोहन सिप्पी का डायरेक्शन भी परिपक्व है। कोर्ट रूम ड्रामा हो या इमोशनल सीन – सब कुछ बैलेंस्ड है। हर एपिसोड में नया ट्विस्ट आता है जो दर्शक को बांधे रखता है।

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