“तालियों से आगे हक”- ISAMRA ने 100 करोड़ रॉयल्टी बांटी, Sonu Nigam की आवाज़ बनी पहचान

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 06:03 PM

isamra distributed 100 crore royalties

भारतीय संगीत की दुनिया में अक्सर सुर गूंजते रहे, तालियां बजती रहीं, और कलाकारों को प्यार मिलता रहा…लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है।इस बार सिर्फ सराहना नहीं, सम्मान मिला है।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय संगीत की दुनिया में अक्सर सुर गूंजते रहे, तालियां बजती रहीं, और कलाकारों को प्यार मिलता रहा…लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है।इस बार सिर्फ सराहना नहीं, सम्मान मिला है। सिर्फ पहचान नहीं, अधिकार मिला है।

Indian Singers' and Musicians' Rights Association (ISAMRA) ने ₹100 करोड़ की रॉयल्टी का वितरण कर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसने 26,000 से अधिक गायकों और संगीतकारों के जीवन में एक नई रोशनी भर दी है।
वो आवाज़ें… जो सालों से बस गूंजती रहीं4 लाख से ज्यादा गानों की गूंज,4.5 करोड़ से ज्यादा बार बजते सुर,रेडियो से लेकर डिजिटल दुनिया तक…ये वो आवाज़ें थीं, जो हर दिल में बसीं,पर अक्सर उनके पीछे खड़े कलाकारों को उनका हक नहीं मिला।

अब मिला है।ये सिर्फ एक रकम नहीं… एक एहसास है
₹100 करोड़ —ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं,ये उन अनगिनत रातों का मूल्य है,जब किसी गायक ने दिल से सुर निकाला था।
ये उन अनसुने सेशन आर्टिस्ट्स की पहचान है,जो परदे के पीछे रहकर भी संगीत को जादू बनाते रहे।
हर पीढ़ी की आवाज़, एक साथ

इस पहल में वो सभी नाम शामिल हैं, जिनकी आवाज़ें हमारी यादों का हिस्सा हैं:
Lata Mangeshkar की पवित्रता
Kishore Kumar की मासूमियत
Mohammed Rafi की गहराई
Asha Bhosle की चंचलता

आज की पीढ़ी की धड़कन:
Arijit Singh
Shreya Ghoshal
Diljit Dosanjh
Sonu Nigam

ये सिर्फ नाम नहीं… ये वो एहसास हैं, जो पीढ़ियों को जोड़ते हैं।
“इस बार तालियों से आगे बढ़कर बहुत कुछ हुआ…”

Sonu Nigam के शब्दों में- “यह कदम तालियों से कहीं आगे है। इसने कलाकारों को आर्थिक पहचान दी है…अब सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि गरिमा और स्थायित्व भी मिला है।”

एक बदलाव… जो इतिहास लिख रहा है.ISAMRA ने सिर्फ रॉयल्टी नहीं बांटी उसने एक सोच बदली है।उसने ये साबित किया है कि कलाकार सिर्फ याद किए जाने के लिए नहीं होते,बल्कि उनके योगदान का मूल्य भी होना चाहिए। अब सुरों को सिर्फ सुना नहीं जाएगा… समझा भी जाएगा यह ₹100 करोड़ का वितरण एक नई शुरुआत है—जहाँ हर सुर के पीछे खड़े कलाकार को उसका हक मिलेगा,जहाँ हर आवाज़ को उसका सम्मान मिलेगा।और शायद पहली बार,संगीत की दुनिया में यह एहसास गूंज रहा है-  “अब कलाकार सिर्फ गाएंगे नहीं… बल्कि अपने हक के साथ जिएंगे।”

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!