Satrangi: Badle Ka Khel Review: जातिवाद, बदले और राजनीति के खेल में उलझी कहानी

Edited By Updated: 22 May, 2026 09:42 AM

satrangi badle ka khel review in hindi

यहां पढ़ें कैसी वेब सीरीज सतरंगी- बदले का खेल

वेब सीरीज-  सतरंगी: बदले का खेल (Satrangi- Badle ka Khel)
स्टारकास्ट- उपेंद्र चौहान (Upendra Chauhan), अंशमान पुष्कर (Anshuman Pushkar), कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra) और आरजे माहवश (Rj Mahvesh)
डायरेक्टर- जय बसंतु सिंह (Jai Basantu Singh)
ओटीटी प्लेटफॉर्म- जी5 (Zee5)
रेटिंग- 3*


Satrangi- Badle ka Khel: आज यानी 22 मई को जी5 की मोस्ट अवेटेड सीरीज सतरंगी: बदले का खेल रिलीज हो चुकी है। इस सीरीज को जय बसंतु सिंह द्वारा डायरेक्ट किया गया है। सतरंगी: बदले का खेल एक दमदार सामाजिक और राजनीतिक ड्रामा है, जो बदले की कहानी के साथ समाज में फैली ऊंच-नीच, जातिगत भेदभाव और सामाजिक कलंक की कड़वी सच्चाइयों को सामने लाती है। यह फिल्म ग्रामीण जीवन की वास्तविकता, मनोवैज्ञानिक संघर्ष और सत्ता के खेल को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाती है। खास बात यह है कि कहानी में लौंडा नाच जैसी पारंपरिक लोक कला को केंद्र में रखकर उस दुनिया के दर्द, संघर्ष और अनदेखे पहलुओं को उजागर किया गया है, जो समाज के तानों और भेदभाव के बीच अपनी पहचान बनाने की लड़ाई लड़ती है।

कहानी
सीरीज की कहानी बिहार के डेरा गांव के रहने वाले बबलू से शुरू होती है जो एक छोटी जाति से ताल्लुक रखता है और लौंडा नाच करके अपनी पहचान बनाए हुए है। समाज में ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव के कारण ठाकुर समाज के लोग उसे कभी इज्जत की नजर से नहीं देखते और हर कदम पर उसका अपमान करते हैं। इसी बीच ठाकुर परिवार की बेटी आरती को बबलू से प्यार होता है लेकिन बबलू के दिल में सिर्फ मोहब्बत नहीं, बल्कि वर्षों के अपमान का बदला लेने की आग भी जल रही होती है। ठाकुरों को सबक सिखाने के लिए वह एक ऐसा खतरनाक खेल रचता है, जिसमें कोतवाली और डेरा के ठाकुर आमने-सामने आ जाते हैं। दोनों पक्ष इस साजिश से अनजान रहते हैं और धीरे-धीरे गांव में तनाव, सत्ता और बदले का खेल खून-खराबे की तरफ बढ़ने लगता है। अब इसमें आगे क्या होगा वो तो सीरीज देखने के बाद ही पता चलेगा...


एक्टिंग
सीरीज सतरंगी- बदले का खेल में उपेंद्र चौहान, अंशुमान पुष्कर, कुमुद मिश्रा और आरजे माहवश ने अपनी दमदार अदाकारी से कहानी को और भी प्रभावशाली बना दिया है। अंशुमान पुष्कर ने बबलू के किरदार में दर्द, गुस्सा और बदले की भावना को बेहद शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा है वहीं कुमुद मिश्रा अपनी गंभीर और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस से हर सीन में अलग छाप छोड़ते हैं। उपेंद्र चौहान ने ग्रामीण परिवेश और सत्ता के संघर्ष को अपने अभिनय से वास्तविक बना दिया, जबकि आरजे माहवश ने अपने किरदार में भावनाओं और मासूमियत का बेहतरीन संतुलन दिखाया है।

डायरेक्शन
इस सीरीज को जय बसंतु सिंह ने डायरेक्ट किया है और उन्होंने ग्रामीण माहौल, जातिगत संघर्ष और बदले की कहानी को काफी वास्तविक अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की है। सीरीज का निर्देशन मजबूत है और कई सीन्स अपनी सिनेमैटोग्राफी व इमोशनल डेप्थ की वजह से असर छोड़ते हैं। हालांकि कहानी कुछ जगहों पर थोड़ी धीमी और बोरिंग महसूस हो सकती है लेकिन इसके बावजूद इसमें मौजूद सस्पेंस, राजनीति और बदले का खेल दर्शकों को आखिर तक बांधे रखता है।

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!