इसी फिल्म और अपने हॉलीवुड सफर को लेकर विद्युत जामवाल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। बॉलीवुड के एक्शन स्टार विद्युत जामवाल इन दिनों अपनी हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ को लेकर सुर्खियों में हैं। किताओ सकुराई के निर्देशन में बनी यह फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में विद्युत धालसिम के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में एंड्रयू कोजी, नूह सेंटीनो, कैलिना लियांग और रोमन रेंस भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इसी फिल्म और अपने हॉलीवुड सफर को लेकर विद्युत जामवाल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल: आपने कार्यक्रम में करीब 20 मिनट तक बिना पलकें झपकाए मेडिटेशन किया। यह कौन-सा मेडिटेशन है और इसके पीछे क्या सोच है?
विद्युत: इसे स्टिलनेस मेडिटेशन कहते हैं। जापान में इसे जाजेन भी कहा जाता है। इसके अलग-अलग नाम हैं। इसका मकसद पहले स्थिर होना, अपनी सांसों पर ध्यान देना और फिर अपने शरीर और मन पर नियंत्रण हासिल करना है। मैं युवाओं को यही समझाना चाहता हूं कि कभी-कभी बस ठहर जाना भी जरूरी है।
सवाल: आज के युवाओं पर हर क्षेत्र में बेहतर करने का दबाव है। उन्हें आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
विद्युत: युवाओं पर हमेशा कुछ बेहतर करने और आगे निकलने का दबाव रहता है। मैं उनसे कहता हूं कि थोड़ी देर रुक जाओ। हर चीज के पीछे भागने के बजाय चीजों को अपने पास आने दो। जब आप लगातार भागते रहते हैं, तो आसपास की चीजें ठीक से देख नहीं पाते। जैसे तेज रफ्तार गाड़ी में सफर करते हुए आसपास का शहर नजर नहीं आता, लेकिन धीरे चलने पर वही शहर साफ दिखाई देता है। जिंदगी में भी ऐसा ही है। जब आप ठहरना सीख जाते हैं, तो चीजें ज्यादा स्पष्ट होने लगती हैं।
सवाल: धैर्य और अपने मन पर नियंत्रण रखना आसान नहीं होता। क्या ये गुण इंसान में जन्म से होते हैं या इन्हें सीखा जा सकता है?
विद्युत: धैर्य कोई ऐसी चीज नहीं है जो हर किसी को जन्म से मिल जाए। इसे विकसित करना पड़ता है। जिस तरह बोलना सीखने के लिए अभ्यास करना पड़ता है, उसी तरह तनाव से निपटना और धैर्य रखना भी सीखना पड़ता है। बहुत कम लोग होते हैं जिनमें ये गुण स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं।
सवाल: हॉलीवुड फिल्म 'स्ट्रीट फाइटर' में धालसिम का किरदार आपको कैसे मिला? जब इस भूमिका के लिए संपर्क किया गया, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
विद्युत: फिल्म के निर्देशक जापानी हैं और वह हर किरदार के लिए ऐसे कलाकार तलाश रहे थे, जो उस भूमिका के लिए उपयुक्त हों। उदाहरण के लिए, फिल्म में बॉक्सर बालरॉग का किरदार निभाने के लिए 50 सेंट को चुना गया। शुरुआत में अमेरिका में भी उनकी कास्टिंग को लेकर सवाल उठे, लेकिन ट्रेलर आने के बाद लोगों को समझ आ गया कि यह चुनाव सही था। इसी तरह निर्देशक भारत से किसी ऐसे एक्शन स्टार की तलाश में थे जो इस किरदार के साथ न्याय कर सके। उन्होंने मेरी फिल्मों को देखा मेरे काम और अनुभव को समझा। इसके बाद मेरा ऑडिशन हुआ और फिर मुझे धालसिम के किरदार के लिए चुन लिया गया।
सवाल: 'स्ट्रीट फाइटर' में दुनिया के कई बड़े सितारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
विद्युत: यह अनुभव शानदार रहा। सेट पर 50 सेंट, रोमन रेंस और कोडी रोड्स जैसे दिग्गज मौजूद थे। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र के लीजेंड हैं। इनके साथ काम करना और इन्हें करीब से देखना अपने आप में एक अलग अनुभव था। हर व्यक्ति की अपनी अलग पहचान और व्यक्तित्व था। मुझे उनके साथ समय बिताने, उनसे सीखने और उनके काम करने के तरीके को देखने का मौका मिला। सेट पर जाने को लेकर हमेशा उत्साह रहता था।
सवाल: क्या आपने पहले कभी 'स्ट्रीट फाइटर' गेम खेला था? धालसिम का किरदार निभाने के लिए आपको गेम से जुड़ने का मौका मिला?
विद्युत: जब मुझे पता चला कि मैं धालसिम का किरदार निभाने जा रहा हूं उसके बाद मैंने गेम खेलना शुरू किया। मुझे इसे खेलने में काफी मजा आया। हालांकि, यह आसान नहीं है। धालसिम को खेलना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन एक बार इसकी आदत हो जाए तो यह काफी दिलचस्प और लत लगाने वाला बन जाता है।
सवाल: हॉलीवुड में काम करने और भारत में काम करने के तरीके में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या नजर आया?
विद्युत: सबसे बड़ा अंतर वहां के नियमों और कानूनों का पालन करने में है। वहां हर चीज तय नियमों के अनुसार चलती है। अगर किसी कलाकार को सुबह आठ बजे सेट पर पहुंचना है, तो वह समय पर पहुंचता है। कलाकार अपने कॉन्ट्रैक्ट से बंधे होते हैं और नियमों का पालन करना जरूरी होता है। तकनीशियनों को भी उनके काम के हिसाब से भुगतान किया जाता है। वहां हर चीज की योजना पहले से तैयार होती है और समय का बहुत ध्यान रखा जाता है। मुझे वहां की प्लानिंग और काम करने का अनुशासन काफी अच्छा लगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि भारत में भी 'स्ट्रीट फाइटर' जैसी बड़े स्तर की एक्शन फिल्में बन सकती हैं?
विद्युत: बिल्कुल, उम्मीद है कि ऐसा होगा। भारत में अगर कोई गेम लोकप्रिय होता है और दुनिया भर में अपनी पहचान बनाता है तो उस पर फिल्म भी बनाई जा सकती है। हमारे यहां ऐसे निर्देशक हैं जो विदेशी गेम्स को भारतीय दर्शकों के हिसाब से पर्दे पर उतारने में सक्षम हैं। मुझे लगता है कि सही कहानी और सही टीम के साथ ऐसा जरूर हो सकता है।
सवाल: भारतीय सिनेमा और हॉलीवुड के फिल्म निर्माण के तरीके में आपको क्या बड़ा अंतर दिखाई देता है?
विद्युत: भारतीय सिनेमा ने 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी फिल्मों के जरिए दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है। लोग हमारे सिनेमा को समझ रहे हैं और हमारे काम की सराहना भी कर रहे हैं। लेकिन हॉलीवुड के स्तर तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। वहां फिल्म निर्माण की प्रक्रिया काफी अलग है। हर विभाग का काम तय होता है और सभी अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाते हैं। वहां अनुशासन और योजना पर बहुत ध्यान दिया जाता है। भारत में भी यह व्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
सवाल: आप अपनी जिंदगी में पहाड़ों पर अकेले समय बिताने जाते हैं। इसकी शुरुआत कैसे हुई और ऐसा करना आपके लिए क्यों जरूरी है?
विद्युत: हर इंसान जानता है कि खुद के लिए समय निकालना जरूरी है लेकिन सवाल यह है कि हम वास्तव में ऐसा करते कितनी बार हैं। कितने लोग रविवार को आराम से धूप में बैठते हैं या चांद को देखकर सुकून महसूस करते हैं? मुझे लगता है कि ऐसा करना बहुत जरूरी है। जब आप खुद के साथ समय बिताते हैं, तो अपने आसपास की चीजों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। जब भी मुझे लगता है कि मुझे खुद को दोबारा ऊर्जा से भरने की जरूरत है, मैं ऐसा करता हूं। यह मेरे लिए सिस्टम को रीबूट करने जैसा है। हर व्यक्ति को अपने लिए यह समय निकालना चाहिए।
सवाल: आपकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू क्या है, जिसके बारे में लोग कम जानते हैं?
विद्युत: मैं पिछले करीब 15 साल से लोगों को शारीरिक दर्द से राहत दिलाने में मदद कर रहा हूं। किसी को कहीं दर्द होता है तो लोग मुझसे संपर्क करते हैं और मुझे उनकी मदद करना अच्छा लगता है। इन दिनों मेरा खास ध्यान बुजुर्गों को सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करने पर है। मैंने अपनी मां को भी देखा है कि जानकारी होने के बावजूद कभी-कभी लोग आलस या उम्र के कारण खुद को सक्रिय नहीं रख पाते। इसलिए मैं बुजुर्गों के लिए वीडियो बनाने पर काम कर रहा हूं, ताकि उन्हें प्रेरित कर सकूं कि उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वे कुछ करना बंद कर दें।
सवाल: आप चाहते हैं कि इस फिल्म के बाद दर्शक और फिल्म इंडस्ट्री आपको किस नजरिए से देखें?
विद्युत: मैं जिस जगह पर हूं, वहां बहुत खुश हूं। मेरी उम्मीद है कि लोग मुझे इसी तरह देखें और उन्हें लगे कि मैं इससे भी ज्यादा काम करने का हकदार हूं। अगर दुनिया भर में ऐसे लोग मिलें, जिन्हें लगता है कि आपको और मौके मिलने चाहिए तो यह अपने आप में बहुत अच्छी बात है।
सवाल: अपने प्रशंसकों और 'स्ट्रीट फाइटर' देखने की योजना बना रहे दर्शकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?
विद्युत: अपने प्रशंसकों से कहना चाहता हूं कि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। जो लोग 'स्ट्रीट फाइटर' गेम के बारे में नहीं जानते या जिन्होंने इसे नहीं देखा है, वे फिल्म जरूर देखें। यह अलग तरह का सिनेमा है, जिसमें मनोरंजन, पागलपन और शानदार एक्शन देखने को मिलेगा। फिल्म में दुनिया के बड़े सितारे हैं। उम्मीद है कि दर्शक इसका भरपूर आनंद लेंगे।