इस सीरीज के बारे में जिम सर्भ, नमिता दुबे और वैभव तत्ववाड़ी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। टाइटन सिर्फ एक घड़ी का ब्रांड नहीं, बल्कि भारत की उद्यमिता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक कहानी है। इसी कहानी को पर्दे पर लेकर आई है वेब सीरीज़ ‘टाइटन: ए स्टोरी मेड इन इंडिया’, जो अमेजन और एम एक्स प्लेयर पर 3 जून को रिलीज हो चुकी है। रॉबी ग्रेवाल द्वारा डायरेक्टेड इस सीरीज में जिम सर्भ, नसीरुद्दीन शाह, नमिता दुबे, वैभव तत्ववाड़ी, कावेरी सेठ मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस सीरीज के बारे में जिम सर्भ, नमिता दुबे और वैभव तत्ववाड़ी ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
वैभव तत्त्ववादी
सवाल: जब आपने पहली बार ‘टाइटन’ नाम सुना और इस प्रोजेक्ट के बारे में जाना, तब आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
वैभव तत्त्ववादी: मेरे लिए तो यह बिल्कुल 'नो ब्रेनर' था। मुझे निर्माता का फोन आया और उन्होंने कहा कि वह एक नया प्रोजेक्ट कर रहे हैं जिसका नाम टाइटन है। उन्होंने मुझे बताया कि वह चाहते हैं कि मैं टाइटन के संस्थापकों में से एक का किरदार निभाऊं। मैंने तुरंत हां कर दी। बाद में मैं निर्देशक रॉबी ग्रेवाल से मिला। उनसे मिलते ही यह साफ हो गया कि उनके दिमाग में शो को लेकर पूरी स्पष्टता है। उन्हें पता था कि वह क्या बनाना चाहते हैं और कैसे बनाना चाहते हैं। उसके बाद इस टीम का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद आसान फैसला था। शूटिंग के दौरान सभी कलाकारों और तकनीशियनों के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा।
सवाल: निर्देशक रॉबी ग्रेवाल के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
वैभव तत्त्ववादी: सबसे बड़ी बात यह थी कि सेट का माहौल बेहद सकारात्मक था। जब निर्देशक आपको प्रयोग करने की आज़ादी देता है और साथ ही उसे यह भी पता होता है कि उसे आखिर चाहिए क्या, तब अभिनेता अपना सौ प्रतिशत दे पाता है। यह सीरीज़ किसी भी निर्देशक के लिए आसान नहीं थी। एक पूरा दौर दोबारा बनाना, टाइटन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की कहानी कहना और उससे जुड़े लोगों की भावनाओं का सम्मान करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। लेकिन रॉबी सर और पूरी टीम ने इसे बेहतरीन ढंग से निभाया। मैं हमारे डीओपी आदित्य कपूर का भी ज़िक्र करना चाहूंगा। जो दुनिया दर्शकों को स्क्रीन पर दिखाई देती है, वह काफी हद तक उनकी नजरों से दिखाई देती है। उन्होंने भी कमाल का काम किया है।
सवाल: जिम के साथ आपकी दोस्ती ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन कैसी रही?
वैभव तत्त्ववादी: पहली ही रीडिंग में मुझे महसूस हो गया था कि हमारी अच्छी दोस्ती होने वाली है। मेरे लिए सबसे जरूरी बात होती है कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान माहौल खुशनुमा बना रहे। हम दोनों की अभिनय प्रक्रिया अलग है सोच अलग है लेकिन हम एक-दूसरे की पसंद और काम करने के तरीके का सम्मान करते हैं। यही वजह है कि हमारी केमिस्ट्री इतनी सहज बन पाई।
सवाल: नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ काम करने से आपने क्या सीखा?
वैभव तत्त्ववादी: मेरे लिए यह बेहद खास अनुभव था। अभिनय सीखने के शुरुआती दिनों से मैं रिदम शब्द को समझने की कोशिश कर रहा था। नसीर सर के साथ काम करते हुए मुझे उसका वास्तविक अर्थ समझ में आया। मैंने सेट पर एक छात्र की तरह उन्हें लगातार देखा और उनसे सीखा। उनके साथ काम करने के बाद एक अभिनेता के रूप में मेरे अंदर सकारात्मक बदलाव आया है। मेरे अभिनय को देखने और समझने का नजरिया बदला है।
जिम
सवाल: आपके लिए टाइटन की कहानी कितनी खास थी?
जिम सर्भ: मैंने पहले से टाइटन के बारे में बहुत कुछ सुना था। यहां तक कि इसकी कहानी MBA पाठ्यक्रमों में भी पढ़ाई जाती है कि कैसे एक स्टार्टअप शुरू हुआ और आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े वॉच ब्रांड्स में शामिल हो गया। जब मुझे इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव मिला तो मैं तुरंत आकर्षित हो गया। निर्माता सुनील बोहरा का इस कहानी के प्रति जो जुनून था, वह संक्रामक था। उनका उत्साह देखकर मैं भी इस कहानी का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हो गया।
यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है, बल्कि एक विज़न की है। ज़ेरक्सेस देसाईदेसाई ने पहले एक सपना देखा, फिर उस सपने को पूरा करने के लिए एक टीम बनाई और सबने मिलकर उसे हकीकत में बदल दिया। दिलचस्प बात यह है कि हमारी शूटिंग प्रक्रिया भी कुछ वैसी ही थी। पूरी टीम एक परिवार की तरह काम कर रही थी।
सवाल: आपका लुक काफी अलग नजर आ रहा है। इसके लिए आपने क्या तैयारी की?
जिम सर्भ: हां, मैंने वास्तव में अपने सिर के बाल मुंडवाए थे। शूटिंग के दौरान हर सुबह मेरा सिर शेव किया जाता था। मेरी हेयर और मेकअप आर्टिस्ट प्रिया ने इसमें बहुत मेहनत की। जब मैंने पहली बार खुद को उस लुक में देखा तो यह मेरे लिए भी नया अनुभव था लेकिन किरदार के लिए यह जरूरी था। अब शुक्र है कि बाल वापस आ गए हैं।
सवाल: आपने नसीरुद्दीन शाह से क्या सीखा?
जिम सर्भ: उनकी सबसे बड़ी खूबी है – सुनना। वह सिर्फ कानों से नहीं, पूरे शरीर और पूरे ध्यान से सुनते हैं। सीन के दौरान सामने वाला अभिनेता क्या कर रहा है, उसकी बॉडी लैंग्वेज क्या है, उसके व्यवहार में क्या बदलाव आ रहा है वह सब नोटिस करते हैं। फिर उसी के हिसाब से अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। उनके साथ काम करते हुए एहसास होता है कि अभिनय की बुनियादी चीजें अगर पूरी ईमानदारी से की जाएं तो वही सबसे प्रभावशाली होती हैं।
नमिता
सवाल: इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की आपकी कहानी क्या रही?
नमिता दुबे: मैं उस समय किसी दूसरे प्रोजेक्ट की शूटिंग कर रही थी। मुझे ऑडिशन के लिए कहा गया लेकिन मेरे मन में पहला ख्याल यही आया कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट है, इसमें मेरा चयन शायद नहीं होगा। फिर सीधे निर्देशक रॉबी ग्रेवाल से बात हुई और मुझे बताया गया कि वे मुझे इस किरदार के लिए देख रहे हैं। बाद में कॉस्ट्यूम, हेयर और मेकअप के जरिए मेरे किरदार का पूरा लुक तैयार किया गया। मेरा रोल भले ही स्क्रीन टाइम के हिसाब से छोटा है, लेकिन कहानी में उसकी अहम भूमिका है। मैं ज़रक्सेस देसाई की पत्नी का किरदार निभा रही हूं। यह दिखाना जरूरी था कि किसी व्यक्ति की पेशेवर सफलता के पीछे उसका पारिवारिक जीवन और रिश्ते किस तरह योगदान देते हैं।
सवाल: आपके किरदार की अहमियत क्या है?
नमिता दुबे: मुझे लगता है कि एक स्थिर और सहयोगी जीवनसाथी किसी भी व्यक्ति को बेहतर फैसले लेने में मदद करता है। शो में दिखाया गया है कि ज़ेरक्सेस देसाई का पारिवारिक जीवन उनकी सोच और फैसलों को किस तरह प्रभावित करता है। उनकी पत्नी सिर्फ घर में बैठकर इंतजार करने वाली महिला नहीं है। वह खुद एक पेशेवर महिला है, उसकी अपनी पहचान और करियर है। यही बात मुझे इस किरदार में सबसे ज्यादा पसंद आई।
सवाल: आपने कहा था कि शुरुआत में आपको लगा था कि यह रोल शायद आपको नहीं मिलेगा। ऐसा क्यों?
नमिता दुबे: मैं एक टियर-2 शहर से आती हूं और पिछले कई वर्षों से इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हूं। इस सफर में कई बार आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है। कई बार जब कोई बड़ा अवसर सामने आता है तो पहला ख्याल यही आता है कि शायद यह मेरे लिए नहीं है। हालांकि बाद में जब मैंने किरदार को समझा तो महसूस हुआ कि मैं इसके लिए बिल्कुल सही थी। लेकिन आत्मविश्वास से जुड़ी यह लड़ाई शायद हर कलाकार के जीवन का हिस्सा होती है।
सवाल: टाइटन से जुड़ी आपकी कोई व्यक्तिगत याद?
वैभव तत्त्ववादी: जब मैं 12वीं की परीक्षा पास करके पुणे के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने गया था तब मेरे दोस्तों ने मुझे एक टाइटन घड़ी उपहार में दी थी। टाइटन से जुड़ी मेरी सबसे प्यारी याद वही है। दिलचस्प बात यह है कि जब मैं लोगों को बताता था कि मैं टाइटन नाम का प्रोजेक्ट कर रहा हूं तो मैं कहानी नहीं सुनाता था बल्कि लोग मुझे अपनी-अपनी टाइटन से जुड़ी यादें सुनाने लगते थे।
जिम सर्भ: लंबे समय तक मुझे लगता था कि घड़ी और बाकी आभूषण सिर्फ अतिरिक्त बोझ हैं। क्योंकि मुझे ऐसा लगता था कि इसे हर जगह अपने साथ रखना और कहीं मैं भूल गया या टूट गई तो मैं बहुत इनसे दूर रहता था। लेकिन बाद में मेरे पिता ने मुझे एक बेहद खूबसूरत और सादगी भरी घड़ी उपहार में दी। उसके बाद मेरी सोच बदली और धीरे-धीरे मैंने घड़ियों की सराहना करना शुरू किया।
नमिता दुबे: मेरे पास कभी अपनी घड़ी नहीं रही। लेकिन मेरी मां आज भी टाइटन की घड़ी पहनती हैं। इस प्रोजेक्ट के दौरान मैंने इस बात पर खास ध्यान दिया और महसूस किया कि टाइटन हमारे परिवार की यादों का भी हिस्सा है।
सवाल: दर्शकों के लिए आपका संदेश?
जिम सर्भ: कृपया ‘टाइटन: ए स्टोरी मेड इन इंडिया’ जरूर देखें। इसे बहुत प्यार और समर्पण के साथ बनाया गया है। जिस खुशी के साथ हमने इसे बनाया, उम्मीद है दर्शकों को भी इसे देखकर उतनी ही खुशी मिलेगी।
वैभव तत्त्ववादी: यह सीरीज़ 3 जून को रिलीज हो चुकी है। हमें पूरा विश्वास है कि दर्शकों को यह कहानी पसंद आएगी।
नमिता दुबे: मैं भी यही कहूंगी कि यह सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि सपनों, मेहनत और भारत की उद्यमशीलता की कहानी है। इसे जरूर देखें।