Edited By Mansi,Updated: 13 Feb, 2026 03:59 PM

शनाया कपूर ने अपनी दूसरी फिल्म ‘तु या मैं’ में बिल्कुल अलग अंदाज दिखाया है। इस फिल्म में वह ऐसे किरदार में हैं, जो शारीरिक, मानसिक और नैरेटिव रूप से चुनौतीपूर्ण है, और यह उनके परफॉर्मेंस की दिशा को दर्शाता है।
नई दिल्ली। शनाया कपूर ने अपनी फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ के भावनात्मक और संतुलित डेब्यू के बाद अब अपनी दूसरी फिल्म ‘तु या मैं’ में बिल्कुल अलग अंदाज दिखाया है। इस फिल्म में वह ऐसे किरदार में हैं, जो शारीरिक, मानसिक और नैरेटिव रूप से चुनौतीपूर्ण है, और यह उनके परफॉर्मेंस की दिशा को दर्शाता है।
कहानी और निर्देशन
बेजॉय नांबियार द्वारा निर्देशित यह फिल्म रोमांटिक नरमी के बजाय जीवन-और-मौत की स्थितियों, डर और नैतिक उलझनों पर केंद्रित है। शनाया कपूर ने अवनी शाह का किरदार निभाया है, जो एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है। उसकी सावधानी से बनाई गई दुनिया तब टूटने लगती है जब वह चरम जीवन-संकट में फंसती है।
शनाया कपूर का अभिनय
शनाया का अभिनय जोर-जबरदस्ती या ड्रामाई एक्सेस पर आधारित नहीं है। वह स्थिरता, हिचकिचाहट और प्रतिक्रियाओं के जरिए किरदार में वास्तविकता भरती हैं। अवनी का किरदार स्टिरियोटाइप में नहीं फंसता; वह सतही तौर पर आत्मविश्वासी लगती है लेकिन अंदर से असुरक्षित और चिंतित है।
एक आलोचक ने कहा, शनाया अपने किरदार अवनी के साथ न्याय करती हैं, आत्मविश्वास और चुपचाप असुरक्षा दोनों को दर्शाती हैं। अवनी का ट्रांज़िशन ग्लैमरस, इमेज-कॉन्शस महिला से डर और भ्रमित सर्वाइवर में प्रभावशाली तरीके से होता है, जो फिल्म में वजन और सह-लीड आदर्श गौरव के साथ उनके संवादों में तनाव और कंट्रास्ट जोड़ता है।
फिल्म का प्रभाव और शनाया की भूमिका
यह फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ से पूरी तरह अलग है। जहां पहले वह संतुलन और भावनात्मक नियंत्रण पर निर्भर थीं, अब वह भय, पैनिक और सर्वाइवल के लिए अपने किरदार को पूरी तरह खोलती हैं। अवनी की गलतियां, चिंता और असमर्थता फिल्म के लिए ईमानदारी और विश्वसनीयता लाती हैं।
‘तु या मैं’ एक जॉनर फिल्म हो सकती है, लेकिन शनाया कपूर के लिए यह साहसिक और चुनौतीपूर्ण किरदार चुनने की दिशा में एक deliberate कदम है। यदि उनकी पहली फिल्म ने उन्हें दर्शकों से मिलवाया, तो यह फिल्म उनकी प्रतिभा और जोखिम लेने की क्षमता को और उभारती है।