Edited By Mansi,Updated: 06 Nov, 2026 01:01 PM

चार यार सीरीज के बारे में डायरेक्टर विनय वैकुल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दोस्ती पर कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं, लेकिन जब दोस्त मुश्किल हालात में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते, तो यह रिश्ता और भी खास बन जाता है। प्राइम वीडियो की हाल ही में रिलीज हुई सीरीज चार यार भी चार दोस्तों की ऐसी ही कहानी है, जिसमें दोस्ती के साथ क्राइम, कई उतार-चढ़ाव और एक-दूसरे के लिए खड़े रहने का जज्बा देखने को मिलता है। सीरीज का निर्देशन विनय वैकुल ने किया है। सीरीज के बारे में डायरेक्टर विनय वैकुल ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल: चार यार क्राइम पर आधारित है, लेकिन इसकी सबसे अहम परत दोस्ती है। आप इस कहानी को किस तरह देखते हैं?
आपने बिल्कुल सही कहा। इस कहानी की नींव चार दोस्त और उनकी दोस्ती है। वे एक-दूसरे के लिए जीने-मरने को तैयार हैं। कहानी में उनके सामने कई मुश्किलें और चुनौतियां आती हैं, जिनसे वे किस तरह निपटते हैं, यही इसका प्लॉट है। लेकिन अगर इस सीरीज की आत्मा की बात करें, तो वह चार दोस्तों का रिश्ता ही है। मुझे लगता है कि दर्शक भी इसी भावना से जुड़ते हैं, क्योंकि बाकी प्लॉट तो कहानी का हिस्सा है।
सवाल: सीरीज में इतने सारे किरदार और उनकी आपस में जुड़ी कहानियां हैं। इन सभी को एक साथ संभालना कितना चुनौतीपूर्ण था?
कहानी की शुरुआत चार लड़कों से होती है और आखिर में भी यह उन्हीं पर आकर खत्म होती है। बाकी किरदार कहानी में आते हैं और उनके अपने मकसद होते हैं। सभी किरदार मुख्य कहानी से जुड़े रहते हैं, इसलिए उन्हें एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी था। इम्तियाज, भालेराव, बाबू, नागरी और वानखेड़े जैसे किरदारों की अपनी खासियत है। अच्छे हों या बुरे, ये सभी किरदार हमारे लिए खास हैं। फिल्ममेकिंग की खूबसूरती भी यही है कि आप अलग-अलग तरह के किरदारों के साथ जीते हैं और फिर उन्हें पर्दे पर उतारते हैं।
सवाल: ‘चार यार’ का आइडिया कैसे आया और आप इस प्रोजेक्ट से कैसे जुड़े?
हुसैन जैदी साहब ने सबसे पहले एक बेसिक कॉन्सेप्ट लिखा था। इसमें मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले चार लड़कों की कहानी थी, जो कार चोरी के एक रैकेट में फंस जाते हैं और फिर उनकी जिंदगी में क्या होता है, यही इसका आधार था। उस समय बीबीसी स्टूडियोज इस प्रोजेक्ट को विकसित कर रहा था। इसके बाद मेरे लेखक सुम्बित मिश्रा और सौरभ सावंत इससे जुड़े। इन चार दोस्तों के किरदारों को जिंदगी के करीब लाने के लिए हमने उस दौर के सामाजिक और पारिवारिक बदलावों को भी कहानी का हिस्सा बनाया। मैं भी उन चार दोस्तों में से एक की तरह उस दौर की जिंदगी से जुड़ाव महसूस करता हूं। हमने जिंदगी में कभी गाड़ियां चोरी नहीं कीं, लेकिन उस समय के अनुभवों और माहौल को दोबारा जीने का मौका जरूर मिला।
सवाल: कहानी में 90 और 2000 के शुरुआती दौर को दिखाया गया है। उस समय के माहौल को आज के दर्शकों के सामने लाना कितना मुश्किल था?
यह निश्चित रूप से आसान नहीं था। समय के साथ शहरों में बहुत बदलाव आ गए हैं। इमारतें बदल गई हैं, पुराने मोबाइल फोन और गाड़ियां अब इस्तेमाल नहीं होतीं। ऐसे में उस दौर को वास्तविक रूप में दोबारा बनाना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, हमारे साथ प्रोडक्शन डिजाइन, कैमरा, वीएफएक्स और रिसर्च की एक अच्छी टीम थी। कलाकारों और तकनीकी टीम ने भी इस दुनिया को फिर से बनाने के लिए काफी मेहनत की। सभी लोग अच्छा काम करना चाहते थे और एक-दूसरे के सुझावों को सुनने के लिए तैयार थे। यह एक सहयोगी प्रक्रिया थी। मुझे लगता है कि पर्दे पर उस मेहनत और टीम की ऊर्जा दिखाई देती है।
सवाल: सीरीज की कास्ट में नए कलाकारों के साथ अनुभवी अभिनेता भी हैं। इतनी अच्छी टीम जुटाने में किसका योगदान रहा?
इसमें कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा और अमेजन की टीम का बड़ा योगदान रहा। चार अपेक्षाकृत नए कलाकारों को साथ लेकर इस सीरीज को बनाना और इसे बेहतर तरीके से पर्दे पर उतारना एक सामूहिक प्रयास था। चंकी पांडे, सिकंदर खेर, राजेश तैलंग और दिब्येंदु भट्टाचार्य जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी बहुत अच्छा काम किया। चंकी पांडे के साथ काम करना मेरे लिए खास अनुभव था, क्योंकि मैं स्कूल के दिनों में उनकी फिल्में देखा करता था। ऐसे कलाकारों के साथ काम करना और उन्हें अपने किरदारों में देखना बहुत मजेदार रहा।
सवाल: आपने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर शुरुआत की और फिर निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। आप किस तरह की कहानियां पसंद करते हैं?
मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं, जिनमें किसी किरदार के सामने कोई लक्ष्य या चुनौती हो और वह उसे पूरा करने की ठान ले। उसके मन में यह बात बैठ जाती है कि चाहे कुछ भी हो जाए, उसे यह काम करके ही रहना है। मेरे लिए उस तरह का जुनून दिलचस्प है, खासकर जब वह किसी अच्छे मकसद के लिए हो। अलग-अलग किरदारों और कहानियों में यह भावना अलग रूपों में सामने आ सकती है। ऐसी कहानियां मुझे ज्यादा प्रेरित करती हैं।