Edited By Pardeep,Updated: 31 Mar, 2026 05:35 AM
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब जमीनी युद्ध (ग्राउंड वॉर) की आशंका तेज हो गई है।
इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब जमीनी युद्ध (ग्राउंड वॉर) की आशंका तेज हो गई है। पिछले हफ्ते करीब 5,000 अमेरिकी सैनिक जिनमें 2,500 मरीन शामिल हैं, पश्चिम एशिया पहुंचे हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में अमेरिका के सैनिकों की संख्या 50,000 से ज्यादा हो गई है। यह साफ संकेत माना जा रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान अब नए चरण में प्रवेश कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन अब अतिरिक्त 10,000 जमीनी सैनिक भेजने की योजना बना रहा है।
आमतौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिका के करीब 40,000 सैनिक तैनात रहते हैं, जिनमें युद्धपोतों पर मौजूद नौसैनिक और कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, सीरिया और जॉर्डन के एयरबेस पर तैनात जवान शामिल होते हैं। विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि यह स्थिति ईराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे और अस्थिर युद्धों की याद दिलाती है जिनसे दूर रहने का वादा डोनाल्ड ट्रंप ने किया था।
क्या जमीनी हमले की तैयारी में है अमेरिका?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अब अगले कदम पर विचार कर रहे हैं, जिसमें जमीनी हमला भी शामिल हो सकता है। इसके पीछे संभावित कारणों पर चर्चा हो रही है जैसे ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) और उसके तेल भंडार को सुरक्षित करना, लगभग 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम के भंडार पर नियंत्रण पाना, जो परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की पकड़ को तोड़ना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है।
इन सबके पीछे एक और बड़ा लक्ष्य “रेजीम चेंज” (सरकार बदलना) भी माना जा रहा है, जिस पर वॉशिंगटन और तेल अवीव दोनों चर्चा कर चुके हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सैन्य ताकत
ताजा सैन्य गतिविधियों के तहत यूएसएस त्रिपोली खाड़ी क्षेत्र में पहुंच चुका है, जिसमें 3,500 से ज्यादा सैनिक हैं। यह एक Amphibious Ready Group (ARG) का हिस्सा है, जिसे अमेरिका की सबसे लचीली और घातक प्रतिक्रिया ताकत माना जाता है। 24 मार्च को 82nd एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 पैराट्रूपर्स को तैनात किया गया और इसके कुछ ही घंटों में 1,000 से 4,000 अतिरिक्त सैनिकों को भी भेजा गया। इनकी तैनाती की सटीक लोकेशन गोपनीय रखी गई है, लेकिन बताया गया है कि इन्हें ईरान के खार्ग द्वीप के नजदीक रखा जाएगा।
USS Boxer और F-35B की तैनाती
चार दिन पहले USS Boxer से 2,500 मरीन और नौसैनिक कैलिफोर्निया से रवाना हुए थे। यह जहाज F-35B स्टील्थ फाइटर्स को भी तैनात कर सकता है। इसी बीच, अमेरिका का सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड फिलहाल युद्ध से बाहर हो गया है। यह क्रोएशिया में मरम्मत के लिए रुका है। अमेरिकी नौसेना ने इसे “तकनीकी खराबी” बताया, जबकि ट्रंप ने दावा किया कि इसे ईरान ने 17 बार निशाना बनाया। इसका मतलब है कि इस जहाज पर मौजूद 4,500 सैनिक फिलहाल इस संघर्ष से बाहर हैं।
नया एयरक्राफ्ट कैरियर भी रवाना
इस कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका अब यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश स्ट्राइक ग्रुप को भी भेज रहा है, जो नॉरफॉक से रवाना हुआ है।
पहले से मौजूद हैं हजारों सैनिक
पश्चिम एशिया में अमेरिका के बड़े सैन्य अड्डे पहले से मौजूद हैं—
- Al Udeid Air Base (कतर) – करीब 11,000 सैनिक
- Al Dhafra Air Base (यूएई) – प्रमुख एयरबेस
- Naval Support Activity Bahrain – 7,000 नौसैनिक, 5वीं फ्लीट मुख्यालय
- Camp Arifjan – 14,000 सैनिक
अफगानिस्तान जैसा दोहराव?
यह सैन्य जमावड़ा अफगानिस्तान युद्ध की याद दिलाता है, जहां शुरुआत 3,000 सैनिकों से हुई थी और बाद में यह संख्या 100,000 से ज्यादा हो गई थी, खासकर बराक ओबामा के कार्यकाल में।
राजनीतिक समर्थन और विरोध
ट्रंप के कुछ सहयोगी जैसे कीथ केलॉग और लिंडसे ग्राहम इस सैन्य तैनाती को जरूरी मानते हैं, ताकि ईरान पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों में इसको लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन-आधारित युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को भारी खतरा हो सकता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है, तो वह और बड़ा जवाब देगा। साथ ही, ईरान Persian Gulf में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है, जिससे अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशन प्रभावित हो सकते हैं।
बढ़ सकता है नुकसान
अब तक इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जमीनी युद्ध शुरू हुआ, तो यह आंकड़ा कहीं ज्यादा बढ़ सकता है।