Edited By Pardeep,Updated: 18 May, 2026 10:42 PM

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव अब महायुद्ध की दहलीज पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कूटनीति के लिए समय बहुत कम बचा है।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव अब महायुद्ध की दहलीज पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कूटनीति के लिए समय बहुत कम बचा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अपना रुख नहीं बदला, तो वाशिंगटन "बमों के जरिए" इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकता है।,
पाकिस्तान के जरिए भेजा गया प्रस्ताव 'नाकाफी'
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने रविवार रात पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से एक संशोधित शांति प्रस्ताव अमेरिका को भेजा था। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि इसमें कोई सार्थक प्रगति नहीं है और यह अमेरिका की मुख्य चिंताओं को दूर करने में विफल रहा है।, वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरानी मसौदे में परमाणु हथियार न बनाने की बात तो दोहराई गई है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) रोकने या समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सौंपने पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है।
'घड़ी टिक-टिक कर रही है'
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा, "घड़ी टिक-टिक कर रही है"। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने लचीलापन नहीं दिखाया, तो उसे "बहुत बुरी तरह से निशाना (Hit much harder)" बनाया जाएगा। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने दोटूक शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि ईरानी कुछ ठोस कदम उठाएं, वरना "बमों के जरिए बातचीत" होगी, जो कि एक शर्मनाक स्थिति होगी।
मंगलवार को 'सिचुएशन रूम' में सैन्य विकल्पों पर मंथन
हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस के 'सिचुएशन रूम' में अपनी शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में ईरान की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा और सैन्य विकल्पों (Military Options) सहित वैकल्पिक उपायों पर गहन चर्चा की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि बातचीत को और कितना आगे ले जाया जाए और कब कड़े कदम उठाए जाएं।
प्रतिबंधों पर फंसा पेंच
वर्तमान में दोनों पक्ष समझौते की शर्तों पर एक-दूसरे से काफी दूर हैं। ईरान की मुख्य मांग है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं। हालांकि, अमेरिका ने केवल बातचीत की अवधि के दौरान कुछ प्रतिबंधों (OFAC) में अस्थायी छूट देने का प्रस्ताव दिया है, जिसे ईरान नाकाफी मान रहा है। वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि बिना किसी ठोस परमाणु कटौती के प्रतिबंधों में कोई बड़ी राहत नहीं दी जाएगी।,
अधिकारियों का मानना है कि ईरान का बार-बार नया प्रस्ताव भेजना इस बात का संकेत है कि वह संभावित सैन्य कार्रवाई के खतरे से डरा हुआ है।