Edited By Tanuja,Updated: 28 Feb, 2026 12:36 PM

इजरायल ने ईरान के खिलाफ “प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक” की पुष्टि की है, जिसके बाद तेहरान में धमाके सुने गए। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों वाले देशों और सभी अमेरिकी दूतावासों को चेतावनी दी है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है, जबकि अमेरिका के युद्ध में खिंचने पर...
International Desk: इजरायल के रक्षा मंत्री Yoav Gallant ने घोषणा की है कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ “प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक” शुरू की है। इसके तुरंत बाद Tehran में कई धमाकों की खबरें सामने आईं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन कथित तौर पर इजरायली हवाई हमलों का निशाना बने। इजरायली सरकार का कहना है कि यह कदम “राज्य के खिलाफ संभावित खतरों को निष्क्रिय करने” के लिए उठाया गया। उधर, ईरान ने मिलिट्री और राजनीतिक चैनलों के जरिए उन देशों को चेतावनी दी है जिनके यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडक ने कहा है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो जवाबी कार्रवाई को तैयार हैं और उन देशों के भीतर मौजूद “टारगेट्स” को भी शामिल कर सकती है जहां अमेरिकी सैन्य बेस हैं । इसके साथ ही सभी अमेरिकी दूतावासों को संभावित निशाने के रूप में चेतावनी दी गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका ने सीधे तौर पर ईरान पर हमले की पुष्टि नहीं की है।
क्या अमेरिका युद्ध में खिंचेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीति और इजरायल के कदमों को लेकर अमेरिका में बहस तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है क्या इजरायल अमेरिका को एक और लंबे युद्ध में धकेल रहा है? एक तीखी बहस में मीडिया हस्ती Cenk Uygur और इजरायली सेना (IDF) के पूर्व प्रवक्ता Jonathan Conricus आमने-सामने दिखे। Cenk का तर्क है कि ईरान अमेरिका की मुख्य भूमि तक मिसाइल नहीं पहुंचा सकता, उसके पास परमाणु हथियार नहीं है, और वह युद्ध नहीं चाहता। Conricus का तर्क है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है और अपने प्रॉक्सी समूहों के जरिए क्षेत्र को अस्थिर कर चुका है।
गाजा और वेस्ट बैंक पर टकराव
बहस आगे बढ़ते हुए गाजा और वेस्ट बैंक की भविष्य की स्थिति पर केंद्रित हो गई। Conricus ने दो-राष्ट्र समाधान पर संदेह जताया, जबकि Cenk ने इसे फिलिस्तीनियों के भविष्य से जोड़ते हुए कठोर सवाल उठाए। यह बहस दिखाती है कि इजरायल-ईरान टकराव सिर्फ सैन्य मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक और मानवीय संकट से जुड़ा है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डे जोखिम में आ सकते हैं।तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं। गाजा और वेस्ट बैंक में पहले से जारी तनाव और गहरा सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है।