ईरान युद्ध के बीच मालदीव की चेतावनी, समुद्री सुरक्षा के लिए भारत का साथ जरूरी

Edited By Updated: 11 Mar, 2026 06:05 PM

former maldives defence minister calls to collaborate with india

मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच मालदीव की रणनीतिक समुद्री स्थिति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने दक्षिण एशियाई देशों से भारत के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की, क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान...

International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। Mariya Didi, जो Maldives की पूर्व रक्षा मंत्री हैं, ने कहा है कि मालदीव की भौगोलिक स्थिति महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर होने के कारण बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट के दौर में दक्षिण एशियाई देशों को मिलकर काम करना चाहिए और India जैसे साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी जा सके।

 

मारिया दीदी ने कहा कि मालदीव महत्वपूर्ण सी-लेन्स ऑफ कम्युनिकेशन यानी वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों के बीच स्थित है। इसलिए यह जरूरी है कि दक्षिण एशियाई देश अलग-अलग न सोचें बल्कि एकजुट होकर क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करें। उनका कहना था कि केवल नारेबाजी वाली विदेश नीति से काम नहीं चलेगा, बल्कि भारत और अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना होगा। United States और Israel द्वारा Iran पर 28 फरवरी को किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध अब 12वें दिन में पहुंच चुका है।इन हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ठिकानों और कई प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया था। इसके बाद से दोनों पक्ष लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं और संघर्ष अब लेबनान, इराक और कई खाड़ी देशों तक फैल चुका है।

 

अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है और कई नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है, ताकि Strait of Hormuz को बंद करने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।  इस बीच Donald Trump ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध “बहुत जल्द खत्म हो जाएगा”। वहीं अमेरिकी रक्षा नेतृत्व से जुड़े Pete Hegseth ने संकेत दिया कि यह अभियान अभी शुरुआत है और ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर किया जाएगा।
 
   

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