बांग्लादेश में बिजली का महासंकट; 10 से 16 घंटों के पावर कटों से लोग बेहाल, सरकार ने भारत से मांगी मदद

Edited By Updated: 13 Aug, 2026 04:57 PM

bangladesh goes dark as it battles worst power crisis turns to india for help

बांग्लादेश गंभीर बिजली और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। कई ग्रामीण इलाकों में 8-10 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। गैस और LNG की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकार ने दुकानों और मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया है और भारत से अतिरिक्त...

Dhaka: बांग्लादेश इस वक्त गंभीर बिजली और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश के कई ग्रामीण इलाकों में 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती की खबरें सामने आ रही हैं। भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हो गए हैं कि सरकार ने बिजली बचाने के लिए दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया है। बांग्लादेश में बिजली की मांग करीब 18,000 मेगावाट तक पहुंच गई है, लेकिन उपलब्ध आपूर्ति करीब 13,000 मेगावाट के आसपास रहने से बड़ा अंतर पैदा हो गया है। संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल सप्लाई की मदद भी मांगी है।

 

इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी ढाका के बाहर के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। कई क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रहने से घरों के साथ-साथ कारोबार, खेती और उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। भीषण गर्मी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली की खपत कम करने के लिए सरकार ने दुकानों, बाजारों और शॉपिंग मॉल को जल्दी बंद करने का फैसला किया है। इसका मकसद शाम और रात के समय बिजली की मांग को नियंत्रित करना है, ताकि सीमित बिजली आपूर्ति को जरूरी सेवाओं और घरों तक पहुंचाया जा सके। बिजली कटौती से कारोबारियों में भी नाराजगी बढ़ रही है।

 

 बिजली संकट की बड़ी वजह ईंधन और खासकर प्राकृतिक गैस की कमी बताई जा रही है। बिजली उत्पादन के लिए गैस की उपलब्धता कम होने से कई पावर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से बिजली नहीं बना पा रहे हैं। बांग्लादेश के गैस सेक्टर पर आयात की निर्भरता भी काफी अधिक है। घरेलू उत्पादन में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। मौजूदा संकट को बढ़ाने वाली एक बड़ी घटना 21 जुलाई को हुई, जब अमेरिकी कंपनी Excelerate Energy द्वारा संचालित एक फ्लोटिंग LNG टर्मिनल में आग और तकनीकी खराबी के कारण संचालन प्रभावित हुआ।  इससे बांग्लादेश की गैस आपूर्ति में करीब 450 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन की कमी आई। इससे बिजली उत्पादन, उद्योगों, घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर असर पड़ा।
 

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