आत्मघाती हमले में 5 बच्चों समेत 18 की मौत, PAK आर्मी की चेक पोस्ट पर बाइक से मारी टक्कर

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 12:53 AM

bike collides with pak army check post 18 people killed including 5 children

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाके मीरानशाह में शुक्रवार (6 मार्च 2026) को एक भीषण आत्मघाती हमला हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। बाजार के बीच बने पाकिस्तानी सेना के चेकपॉइंट को निशाना बनाकर किए गए इस धमाके में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी...

इंटरनेशनल डेस्क : पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाके मीरानशाह में शुक्रवार (6 मार्च 2026) को एक भीषण आत्मघाती हमला हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। बाजार के बीच बने पाकिस्तानी सेना के चेकपॉइंट को निशाना बनाकर किए गए इस धमाके में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, शाम करीब साढ़े चार बजे एक हमलावर मोटरसाइकिल पर भारी मात्रा में विस्फोटक लेकर उत्तरी वजीरिस्तान के मीरानशाह शहर में चश्मा पुल के पास स्थित सेना के चेकपॉइंट तक पहुंचा। इसके बाद उसने मोटरसाइकिल को सीधे चेकपॉइंट से टकरा दिया और खुद को उड़ा लिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पास के बाजार में मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आ गए और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मरने वालों में आम नागरिकों के साथ कुछ सैनिक भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि पाकिस्तानी सेना ने अभी तक सैनिकों के नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। मृतकों में पांच बच्चे भी बताए जा रहे हैं। घायलों को तुरंत जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

इस हमले की जिम्मेदारी उस्तुद उल खोरासन (USK) नामक आतंकी संगठन ने ली है। बताया जा रहा है कि यह संगठन हाफिज गुल बहादुर से जुड़े नेटवर्क के तहत काम करता है। हाफिज गुल बहादुर का नाम पहले भी कई आतंकी गतिविधियों से जुड़ चुका है और उसका संबंध पाकिस्तान-अफगान क्षेत्र में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों से रहा है।

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, गुल बहादुर ने शुरुआती दौर में अफगान जिहाद के समय प्रशिक्षण लिया था और बाद में कई संगठनों से जुड़कर आतंकियों की भर्ती और ट्रेनिंग में भूमिका निभाई। वह उत्तरी वजीरिस्तान में एक मदरसा भी चलाता था, जहां से प्रशिक्षित लड़ाकों को अफगानिस्तान और कश्मीर जैसे क्षेत्रों में भेजे जाने के आरोप लगते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लाल मस्जिद घटना के बाद जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का गठन हुआ, तब गुल बहादुर भी उससे जुड़ गया और तब से पाकिस्तान के खिलाफ लगातार हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है।

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