Edited By Mehak,Updated: 10 Feb, 2026 03:37 PM

अंटार्कटिका के मैकमर्डो ड्राई वैली में स्थित ब्लड फॉल्स एक अद्भुत लाल झरना है, जो टेलर ग्लेशियर से लेक बॉनी में गिरता है। इसका लाल रंग लोहे से भरपूर अत्यधिक खारे पानी के ऑक्सीकरण के कारण बनता है, न कि खून या शैवाल से। यह पानी लाखों सालों से ग्लेशियर...
नेशनल डेस्क : अंटार्कटिका की बर्फीली चादरों के बीच एक ऐसा अद्भुत प्राकृतिक नज़ारा है, जिसे देखकर पहली नजर में लगता है जैसे बर्फ के अंदर से खून बह रहा हो। इसे ब्लड फॉल्स (Blood Falls) कहा जाता है। यह झरना दुनिया में कहीं और नहीं मिलता। इसका गहरा लाल रंग असल में लोहे से भरे अत्यधिक खारे पानी (Hypersaline Water) की वजह से बनता है, जो लगभग 50 लाख सालों से ग्लेशियर की मोटी बर्फ के नीचे कैद है।
ब्लड फॉल्स कहां है और इसका रहस्य
ब्लड फॉल्स अंटार्कटिका के सबसे सूखे इलाकों में गिने जाने वाले मैकमर्डो ड्राई वैली (McMurdo Dry Valleys) में स्थित है। यह झरना टेलर ग्लेशियर (Taylor Glacier) से धीरे-धीरे बहकर लेक बॉनी में गिरता है। चारों ओर बर्फ के सफेद परिदृश्य में लाल झरना बेहद आकर्षक दिखता है। इसका पता सबसे पहले 1911 में भू-विज्ञानी थॉमस ग्रिफ़िथ टेलर ने लगाया था। तापमान -19°C तक गिरने के बावजूद यह झरना बहता रहता है, जो वैज्ञानिकों के लिए एक सदी से भी बड़ा रहस्य बना हुआ है।
क्या है लाल रंग का कारण
इस झरने का लाल रंग खून या लाल शैवाल की वजह से नहीं है। इसका कारण एक प्राचीन सब-ग्लेशियल झील है, जो लाखों साल पहले समुद्र के पानी से बनी थी और ग्लेशियर के बढ़ने के कारण ऑक्सिजन और सूरज की रोशनी से कट गई।
- झील के पानी में लोहे के अयनों (Iron ions) की मात्रा बहुत अधिक है।
- पानी का नमक समुद्री पानी की तुलना में दोगुना है, इसलिए यह अत्यधिक ठंड और दबाव में भी जमता नहीं।
- जब यह खारा पानी ग्लेशियर की दरार से बाहर आता है और ठंडी हवा से मिलता है, तो लोहे का ऑक्सीकरण होता है और पानी फेरिक ऑक्साइड (Rust) में बदलकर लाल रंग का हो जाता है। इस कारण झरना बिल्कुल ताजा खून बहते दिखता है।
वैज्ञानिकों ने भी की पुष्टि
शुरू में वैज्ञानिकों को लगा कि यह लाल रंग लाल शैवाल के कारण है। लेकिन 21वीं सदी में हुई रिसर्च, खासकर 2017 में की गई ड्रिलिंग स्टडी ने यह साबित कर दिया कि लाल रंग रसायन विज्ञान का नतीजा है, जैविक कारण नहीं।

जीवन और अंतरिक्ष के संकेत
ब्लड फॉल्स को वैज्ञानिक पानी का टाइम कैप्सूल मानते हैं। इसमें ऑक्सिजन-रहित अंधेरे में पनपने वाले सूक्ष्मजीवी जीवन पाए जाते हैं। इससे वैज्ञानिकों को बर्फीले ग्रहों और चंद्रमाओं, जैसे यूरोपा (Europa) पर जीवन की संभावनाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

बदलते मौसम और भविष्य की चिंता
ब्लड फॉल्स का प्रवाह मौसम के अनुसार बदलता है। गर्म महीनों में यह और तेज बहता है। यह इलाका इतना दुर्गम है कि यहां पहुंचना सिर्फ हेलिकॉप्टर से संभव है। जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका में बर्फ के पिघलने की रफ्तार बढ़ रही है। वैज्ञानिक इस बदलाव की निगरानी कर रहे हैं, क्योंकि बढ़ता तापमान झरने के प्रवाह और संभावित छिपे रहस्यों को प्रभावित कर सकता है।