Edited By Niyati Bhandari,Updated: 10 Feb, 2026 03:09 PM

Promise Day 2026: वैलेंटाइन वीक का पांचवां दिन यानी 11 फरवरी को प्रॉमिस डे मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने पार्टनर, दोस्त या प्रियजनों से जीवनभर साथ निभाने, विश्वास बनाए रखने और ईमानदारी से रिश्ते निभाने का वचन देते हैं। लेकिन हिंदू शास्त्रों में वचन...
Promise Day 2026: वैलेंटाइन वीक का पांचवां दिन यानी 11 फरवरी को प्रॉमिस डे मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने पार्टनर, दोस्त या प्रियजनों से जीवनभर साथ निभाने, विश्वास बनाए रखने और ईमानदारी से रिश्ते निभाने का वचन देते हैं। लेकिन हिंदू शास्त्रों में वचन (Promise) को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि धार्मिक और कर्म से जुड़ा विषय माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, दिया गया वचन अगर पूरा न हो तो उसका प्रभाव केवल रिश्तों पर ही नहीं, बल्कि भाग्य और कर्मफल पर भी पड़ता है।

हिंदू शास्त्रों में वचन का महत्व
महाभारत, रामायण और पुराणों में वचन की महत्ता बार-बार बताई गई है। भगवान राम ने पिता के वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। भीष्म पितामह अपने प्रतिज्ञा के कारण आजीवन ब्रह्मचारी रहे।

शास्त्रों में कहा गया है—
“सत्यं वद, धर्मं चर”
अर्थात सत्य बोलो और धर्म के मार्ग पर चलो।

प्रॉमिस करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
क्षमता से अधिक वचन न दें
हिंदू धर्म में कहा गया है कि ऐसा वचन न दें जिसे निभा न सकें। अधूरा वचन पाप कर्म के समान माना गया है।

भावनाओं में बहकर प्रॉमिस न करें
प्रॉमिस हमेशा शांत मन और स्थिर बुद्धि से करना चाहिए। जल्दबाजी में किया गया वचन बाद में कष्ट का कारण बन सकता है।

धर्म और नैतिकता के विरुद्ध वचन न दें
जो वचन धर्म, सत्य या किसी को नुकसान पहुंचाता हो, वह शास्त्रों में निषिद्ध माना गया है।

समय और परिस्थिति का ध्यान रखें
हर वचन समय के अनुसार निभाया जाना चाहिए। परिस्थिति बदलने पर संवाद करना भी धर्म माना गया है।

प्रॉमिस निभाने से क्या लाभ होते हैं?
रिश्तों में विश्वास और स्थिरता आती है।
मानसिक शांति बनी रहती है।
जीवन में सकारात्मक कर्मफल प्राप्त होता है।
समाज और परिवार में सम्मान बढ़ता है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति अपने वचन का पालन करता है, उस पर ईश्वर की विशेष कृपा बनी रहती है।
