दुनिया में सबसे ज्यादा तेल होने के बावजूद वेनेजुएला गरीब क्यों रहा? जानिए पूरी कहानी

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 10:56 PM

despite having largest oil reserves in world why has venezuela remained poor

वेनेजुएला एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में है। रविवार तड़के अमेरिकी सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को राजधानी काराकस में उनके आवास से हिरासत में ले लिया। दोनों को अमेरिका ले जाया गया है।

इंटरनेशनल डेस्कः वेनेजुएला एक बार फिर दुनिया की सुर्खियों में है। रविवार तड़के अमेरिकी सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को राजधानी काराकस में उनके आवास से हिरासत में ले लिया। दोनों को अमेरिका ले जाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, मादुरो और उनकी पत्नी पर मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं। आज उन्हें न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया जाना है।

हालांकि अमेरिका की यह कार्रवाई अचानक नहीं थी। अमेरिका पिछले काफी समय से वेनेजुएला के खिलाफ रणनीति बना रहा था। बीते साल 2 सितंबर को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला के एक जहाज पर हमला किया था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त से ही दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा बिगड़ गए थे।

अमेरिका–वेनेजुएला के रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे

करीब 3 करोड़ की आबादी वाले वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्ते हमेशा जटिल रहे हैं। इन रिश्तों पर सबसे ज्यादा असर तेल, राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों का रहा है। ऐसा नहीं है कि दोनों देशों के संबंध शुरू से ही खराब रहे हों, लेकिन जैसे-जैसे वेनेजुएला की तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण बढ़ता गया, तनाव भी बढ़ता चला गया।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेजुएला के पास

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अनुमान के मुताबिक, देश के पास 300 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है। यह किसी भी देश से ज्यादा है। तेल भंडार के मामले में दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है, जिसके पास करीब 267 अरब बैरल तेल है। तीसरे नंबर पर ईरान है, जिसके पास 208 अरब बैरल,चौथे नंबर पर कनाडा, जिसके पास 163 अरब बैरल तेल है।

ये चारों देश मिलकर दुनिया के आधे से ज्यादा तेल भंडार रखते हैं। पूरी दुनिया में कुल मिलाकर करीब 1.73 ट्रिलियन बैरल तेल मौजूद माना जाता है। इतना तेल होने के बावजूद वेनेजुएला की हालत बेहद खराब है और वह पहले के मुकाबले आज बहुत कम कमाई कर रहा है।

वेनेजुएला का तेल सस्ता क्यों बिकता है?

वेनेजुएला का ज्यादातर तेल ओरिनोको बेल्ट इलाके में पाया जाता है। यह क्षेत्र देश के पूर्वी हिस्से में करीब 55 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां का तेल एक्स्ट्रा-हेवी क्रूड होता है, यानी बहुत भारी और गाढ़ा।

इस तरह का तेल निकालना मुश्किल होता है, साफ (रिफाइन) करना महंगा पड़ता है और इसमें सल्फर की मात्रा ज्यादा होती है। इसे निकालने के लिए भाप डालने और हल्के तेल के साथ मिलाने जैसी आधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है। इससे उत्पादन लागत काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेनेजुएला का तेल आम कच्चे तेल से सस्ता बिकता है।

सरकारी कंपनी PDVSA बनी बड़ी समस्या

वेनेजुएला में तेल से जुड़ा पूरा काम सरकारी कंपनी PDVSA के हाथ में है। लेकिन

  • मशीनें बहुत पुरानी हैं

  • निवेश की भारी कमी है

  • प्रबंधन कमजोर है

  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव है

इन सब वजहों से PDVSA अपनी पूरी क्षमता से तेल उत्पादन नहीं कर पा रही है।

तेल निर्यात में वेनेजुएला बहुत पीछे

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में वेनेजुएला ने सिर्फ 4.05 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया। इसके मुकाबले सऊदी अरब ने 181 अरब डॉलर, अमेरिका ने 125 अरब डॉलर और रूस ने 122 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया।

ह्यूगो शावेज के बाद हालात बदले

वेनेजुएला OPEC का संस्थापक सदस्य है। एक समय वह अमेरिका को रोज 15–20 लाख बैरल तेल सप्लाई करता था। लेकिन 1998 में ह्यूगो शावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद हालात बदल गए।

शावेज ने

  • तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया

  • PDVSA की संरचना बदली

  • तेल कमाई को राजनीति और घरेलू योजनाओं में झोंक दिया

इससे तेल उत्पादन लगातार गिरता चला गया।

शावेज के निधन के बाद राष्ट्रपति बने निकोलस मादुरो भी हालात नहीं संभाल पाए। इसके बाद स्थिति और बिगड़ती चली गई।

अमेरिकी पाबंदियों ने कमर तोड़ दी

डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने 2017 और 2019 में वेनेजुएला पर कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगा दीं। इसके बाद अमेरिका को तेल बेचना लगभग बंद हो गया। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम तक वेनेजुएला की पहुंच सीमित हो गई। मजबूरी में वेनेजुएला ने अपना तेल चीन, भारत और क्यूबा जैसे देशों को बेचना शुरू किया।

शेवरॉन को मिली सीमित छूट

नवंबर 2022 में अमेरिकी सरकार ने शेवरॉन कंपनी को सीमित रूप से वेनेजुएला में तेल निकालने की इजाजत दी, लेकिन शर्त रखी गई कि इससे होने वाली कमाई सीधे वेनेजुएला सरकार को नहीं मिलेगी। जो बाइडन के कार्यकाल में यह व्यवस्था जारी रही, लेकिन जनवरी 2025 में राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में बड़ा फैसला लिया। उन्होंने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगाने की घोषणा की। इसका मकसद चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर दबाव बनाना था।

इसके बावजूद तेल निर्यात बढ़ा, लेकिन…

इन पाबंदियों के बावजूद चीन ने वेनेजुएला से तेल खरीदना जारी रखा। इसका नतीजा यह हुआ कि 3 सितंबर 2025 तक वेनेजुएला का तेल निर्यात बढ़कर 9 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया। यह पिछले नौ महीनों में सबसे ज्यादा था। हालांकि यह मात्रा अभी भी अमेरिकी पाबंदियों से पहले के स्तर से काफी कम है।

आगे क्या होगा वेनेजुएला का भविष्य?

अमेरिका अब सिर्फ पाबंदियों तक सीमित नहीं रहा। 3 जनवरी को की गई कार्रवाई ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। अब वेनेजुएला का भविष्य इस बात पर टिका है कि अमेरिका आगे क्या रुख अपनाता है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला आज आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबावों में फंसा हुआ है। यही वजह है कि इतना तेल होने के बाद भी यह देश लंबे समय तक “कंगाल” बना रहा।

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