ट्रंप सरकार की चुप्पी पर भड़के एपस्टीन पीड़ित, बोले- “हम नाम जानते हैं...लिस्ट बनाकर खुद करेंगे खुलासा" (Video)

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 03:42 PM

epstein victims say  we know the names  we ll make a list and reveal  video

एपस्टीन कांड में पीड़ितों ने सितंबर 2025 में अपनी अलग सूची बनाने की घोषणा की थी। सरकारी फाइलों में देरी और कार्रवाई की कमी से नाराज़ पीड़ित अब पारदर्शिता की मांग तेज कर रहे हैं, जबकि 2019 से अब तक हजारों दस्तावेज सार्वजनिक होने के बावजूद सीमित...

Washington: कुख्यात यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। सितंबर 2025 में कैपिटल हिल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एपस्टीन के कई पीड़ितों ने घोषणा की थी कि वे अपने शोषणकर्ताओं की एक स्वतंत्र सूची तैयार करेंगे। बीबीसी और एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने कहा था कि वे एपस्टीन के नेटवर्क को अंदर से जानते हैं और कई प्रभावशाली लोगों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से फाइलें जारी करने में लगातार देरी और कार्रवाई की कमी ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया। ड़ितों ने उस समय साफ कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है, लेकिन इसके बावजूद वे सच्चाई सामने लाना चाहते हैं।

 

अब तक क्या सामने आया है?
साल 2019 से अब तक एपस्टीन मामले से जुड़े 1,000 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए जा चुके हैं। इन फाइलों में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं, उद्योगपतियों और रसूखदार हस्तियों के नाम और संपर्कों का उल्लेख है। हालांकि, इन खुलासों के बावजूद अब तक गिसलेन मैक्सवेल के अलावा किसी बड़े नाम पर ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई है। मैक्सवेल को एपस्टीन की नाबालिगों की तस्करी में सहयोग का दोषी ठहराया गया है।

 

मैक्सवेल और ट्रंप का संदर्भ
फरवरी 2026 में अमेरिकी संसद की हाउस ओवरसाइट कमेटी के समक्ष गिसलेन मैक्सवेल की पेशी के दौरान उन्होंने फिफ्थ अमेंडमेंट (खुद के खिलाफ गवाही न देने का अधिकार) का सहारा लिया।मैक्सवेल के वकील ने संकेत दिया कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उन्हें क्लेमेन्सी (रियायत या माफी) दी जाती है, तो वह पूरा सच बताने को तैयार हैं। इस बयान के बाद ट्रंप की भूमिका और एपस्टीन केस को लेकर उनके रुख पर भी बहस तेज हो गई है।

 

पीड़ितों की बढ़ती बेचैनी
पीड़ितों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी यदि न्यायिक कार्रवाई ठप है, तो यह व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उनका आरोप है कि शक्तिशाली लोगों को बचाने के लिए सच्चाई को दबाया जा रहा है। अब पीड़ितों की अगुवाई में जवाबदेही की यह पहल एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस सवाल पर खींच रही है क्या एपस्टीन नेटवर्क के असली गुनहगार कभी कानून के कटघरे में आएंगे?

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