Edited By Tanuja,Updated: 07 Jan, 2026 04:47 PM

ईरान ने इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी के दोषी अली अर्देस्तानी को फांसी दे दी। ईरानी मीडिया के अनुसार उसने क्रिप्टोकरेंसी के बदले संवेदनशील सूचनाएं साझा की थीं। हालिया युद्ध के बाद ईरान में जासूसी मामलों में फांसी तेज हुई है।
International Desk: ईरान ने इजराइल की ‘मोसाद' एजेंसी के लिए जासूसी करने के दोषी एक व्यक्ति को फांसी दे दी। बुधवार को सरकारी मीडिया में प्रकाशित खबरों में यह जानकारी सामने आई है। समाचार एजेंसी ‘ IRNA' ने दोषी की पहचान अली अर्देस्तानी के रूप में की और बताया कि उसने क्रिप्टोकरेंसी के रूप में वित्तीय लाभ के बदले मोसाद अधिकारियों को संवेदनशील जानकारी दी थी। खबरों के मुताबिक, दोषी ने जासूसी के आरोपों को स्वीकार किया था और बताया कि उसे दस लाख डॉलर के वित्तीय लाभ के साथ-साथ ब्रिटेन का वीजा मिलने की उम्मीद थी।
खबरों में अर्देस्तानी को ‘इजराइल के विशेष ऑपरेशनल बल' का सदस्य बताया गया और कहा गया कि उसने मोसाद एजेंटों को ‘विशेष स्थानों' की तस्वीरें व फुटेज दी थीं। आईआरएनए ने अर्देस्तानी की हिरासत के समय और स्थान के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। खबर के मुताबिक, इजराइल ने अर्देस्तानी को ऑनलाइन भर्ती किया था और उसका मामला प्राथमिक अदालतों और देश के उच्चतम न्यायालय दोनों में कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरा। मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों की सरकारों ने ईरान द्वारा मृत्युदंड के बढ़ते उपयोग की निंदा की। कार्यकर्ताओं की दलील है कि कई दोषसिद्धि जबरन लिए गए इकबालिया बयानों पर आधारित हैं और मुकदमे अक्सर बंद दरवाजों में होते हैं, जहां स्वतंत्र कानूनी प्रतिनिधित्व की सुविधा नहीं होती है।
तेहरान ने हालांकि कहा कि जिन लोगों को फांसी दी गई वे ‘शत्रु खुफिया एजेंसियों के एजेंट' थे, जो आतंकवाद या देश को नुकसान पहुंचाने की गतिविधियों में शामिल थे। ईरानी अधिकारियों ने इजराइल पर ईरान के अंदर गुप्त हमलों की साजिश रचने का आरोप लगाया, जिनमें परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं और रणनीतिक सुविधाओं में साइबर सेंध शामिल हैं। जून में इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमले के बाद से तेहरान ने जासूसी के आरोप में 12 लोगों को फांसी दी है। इजराइली हमले में वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों सहित लगभग 1,100 लोग मारे गए थे। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने इजराइल में मिसाइल हमले किए, जिनमें 28 लोग मारे गए।