Edited By Tanuja,Updated: 19 Mar, 2026 12:51 PM

अमेरिका के पूर्व अधिकारी Joe Kent ने दावा किया कि ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू कराने में इजराइल की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि ईरान से तत्काल परमाणु खतरा नहीं था, जबकि Donald Trump ने उनके रुख को गलत बताया।
Washington: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के निदेशक Joe Kent ने एक बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच मौजूदा टकराव को शुरू करने में इजराइल की अहम भूमिका रही। केंट ने यह बात Tucker Carlson के शो में बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इजराइल के दबाव में यह कदम उठाया गया, जबकि पहले से ही पता था कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा और इससे हालात बिगड़ेंगे।
केंट ने ईरान के परमाणु खतरे को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान उस समय परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था। उनके अनुसार, 2004 से ईरान में एक धार्मिक आदेश (फतवा) लागू है, जो परमाणु हथियार बनाने के खिलाफ है, और ऐसा कोई खुफिया सबूत नहीं था कि इसे तोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा तत्काल हमले की कोई ठोस योजना नहीं थी। यानी जिस आधार पर युद्ध की शुरुआत हुई, वह पूरी तरह मजबूत नहीं था।जब उनसे पूछा गया कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो जाती है तो क्या असर होगा, तो केंट ने कहा कि इससे ईरान की सत्ता खत्म नहीं होगी। उनके मुताबिक, ईरानी शासन इतना मजबूत है कि किसी एक व्यक्ति की मौत से वह नहीं टूटेगा।
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जो केंट के बयानों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि केंट सुरक्षा मामलों में कमजोर थे और उनका पद छोड़ना “अच्छी बात” है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान एक बड़ा खतरा है और दुनिया के कई देश इसे समझते हैं। इस बयानबाजी से साफ है कि अमेरिका के अंदर ही ईरान को लेकर गहरे मतभेद हैं। एक तरफ सरकार ईरान को बड़ा खतरा बता रही है, वहीं कुछ पूर्व अधिकारी इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ऐसे बयान हालात को और ज्यादा जटिल बना सकते हैं और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।