जापान ने मुस्लिम कब्रिस्तान बनाने की अनुमति ठुकराई, शवों को गृह देश भेजने के निर्देश

Edited By Updated: 29 Nov, 2025 08:24 PM

japan rejects muslim cemetery construction cremation policy

जापान ने देश में मुस्लिम कब्रिस्तानों के निर्माण की योजनाओं को खारिज कर दिया है। सरकार ने कहा कि जापान में पारंपरिक रूप से शवदाह प्रथा अपनाई जाती है और दफनाने के लिए अवशेषों को गृह देशों में भेजना उचित है। भूमि की कमी और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला...

इंटरनेशनल डेस्क : जापान ने देश के भीतर मुस्लिम कब्रिस्तानों के निर्माण की योजनाओं को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। इस फैसले पर जापान ने बिल्कुल भी विचार नहीं किया और इसे अपनी पुरानी परंपराओं के अनुरूप बताया है। जापान की ओर से इस निर्णय पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट बयान दिया गया है।

MP मिज़ुहो उमेमुरा ने कहा "जापान में शवदाह (cremation) की परंपरा है। मुस्लिमों के लिए उचित तरीका यह है कि वे अवशेषों को दफनाने के लिए उनके गृह देशों में वापस भेज दें।" 

जापानी परंपरा और सांस्कृतिक प्राथमिकता
यह निर्णय जापान की पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है, जहां बौद्ध धर्म और शिंटो धर्म के प्रभाव के कारण शवदाह (Cremation) ही अंतिम संस्कार का मुख्य तरीका रहा है।

शवदाह पर जोर: जापान में 99% से अधिक अंतिम संस्कार शवदाह के माध्यम से किए जाते हैं।

भूमि की कमी: जापान, विशेषकर उसके शहरी क्षेत्रों में, भूमि की भारी कमी है, जिसके कारण बड़े कब्रिस्तान बनाना एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है।

प्रवासी मुस्लिम समुदाय पर असर
यह फैसला देश में रह रहे प्रवासी मुस्लिम समुदाय और जापान की नागरिकता प्राप्त कर चुके मुस्लिमों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है, जिनके धर्म में अंतिम संस्कार के लिए दफन (Burial) को अनिवार्य माना जाता है। इस निर्णय के बाद उन्हें अपने मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए अवशेषों को वापस उनके मूल देशों में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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