पाकिस्तान में सरकारी इशारे पर चल रहे ‘डेथ स्क्वॉड्स’! बलूचिस्तान में बढ़ी हत्याएं, युवा कारीगर के मर्डर पर बढ़ा बवाल

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 02:09 PM

pakistan accused of shielding death squads as killings in balochistan

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कथित राज्य-समर्थित “डेथ स्क्वॉड्स” द्वारा लक्षित हत्याओं और शव बरामदगी के आरोप तेज हो गए हैं। बलूच यकजैहती कमेटी ने युवा कारीगर की हत्या का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।

International Desk: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित राज्य-समर्थित हिंसा के नए आरोप सामने आए हैं। Baloch Yakjehti Committee (BYC) ने दावा किया है कि टंप क्षेत्र के 23 वर्षीय युवक की सशस्त्र समूह ने गोली मारकर हत्या कर दी, जो कथित तौर पर आधिकारिक संरक्षण में काम करता है।BYC के अनुसार, मृतक की पहचान फराज़, पुत्र बहादुर, निवासी कोशकलात (टंप) के रूप में हुई है। समिति का आरोप है कि स्थानीय लोग ऐसे सशस्त्र गिरोहों को “डेथ स्क्वॉड” कहते हैं, जो असहमति दबाने और युवा बलूच पुरुषों को डराने के लिए सक्रिय हैं। संगठन ने कहा कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ये नेटवर्क बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।

BYC ने फराज़ को एक कुशल कढ़ाई कारीगर बताया, जो अपने परिवार की आजीविका चलाता था। समिति के मुताबिक, उसकी हत्या नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का खतरनाक संकेत है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पहले भी जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर कार्रवाइयों के बढ़ते मामलों पर चेतावनी दी है।इसी बीच, पांजगुर जिले में भी शव मिलने की खबरें हैं। The Balochistan Post के अनुसार, CPEC मार्ग पर पांजगुर गैस प्लांट के पास एक शव मिला, जिसे पहचान के लिए अस्पताल भेजा गया। इससे पहले शापाटन इलाके से बरामद दो शवों की पहचान जंगियान (पुत्र अब्दुल रशीद) और सईद (पुत्र मोलादाद) के रूप में हुई।

 

संकलित रिपोर्टों में इस वर्ष कई कथित न्यायेतर हत्याओं का उल्लेख है जैसे करीम जान, जासिम जान, पज़ीर बलोच, नवाब अब्दुल्ला और जंगियान बलोच। जनवरी में जोहैब का शव भी मिला था, जो पहले लापता बताया गया था।BYC ने United Nations Security Council, International Criminal Court, Amnesty International और Human Rights Watch से स्वतंत्र जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जारी गुमशुदगियां, अवैध हिरासत और हत्याएं व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर इशारा करती हैं और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी से अत्याचार और बढ़ सकते हैं।

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