Edited By Tanuja,Updated: 12 May, 2026 02:41 PM

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के जवाब को “garbage” बताया, जबकि तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट, युद्ध मुआवजा और अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने जैसी शर्तें रखीं। तेल कीमतें बढ़ीं और वैश्विक...
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम वेंटिलेटक “life support” पर है और तेहरान द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को उन्होंने कचरा “garbage” करार दिया। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने ईरान का जवाब पूरा पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका शांति समझौते की कोशिशों में जुटा था। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कई कठोर मांगें रखीं। इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, विशेषकर लेबनान (Lebanon)में जारी संघर्ष रोकना, होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता स्वीकार करवाना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है। अमेरिका चाहता था कि पहले युद्धविराम स्थायी हो और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत शुरू की जाए। लेकिन ईरान की नई शर्तों ने बातचीत को लगभग ठप कर दिया है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में फिर उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 104.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा सप्लाई लाइन मानी जाती है। युद्ध से पहले यहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG शिपमेंट गुजरते थे। अब यह मार्ग लगभग बंद जैसी स्थिति में पहुंच गया है।रॉयटर्स के अनुसार, पिछले सप्ताह केवल तीन तेल टैंकर ही इस रास्ते से निकल पाए और उन्होंने सुरक्षा कारणों से अपने ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद कर दिए थे।
अमेरिका के नए प्रतिबंध
अमेरिका ने सोमवार को उन कंपनियों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए जो कथित रूप से ईरानी तेल को चीन भेजने में मदद कर रहे थे। वॉशिंगटन का कहना है कि इससे ईरान के सैन्य और परमाणु कार्यक्रमों की फंडिंग रोकी जाएगी। इसी बीच ट्रंप बुधवार को चीन पहुंच सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से होगी। माना जा रहा है कि ईरान संकट इस बैठक का प्रमुख मुद्दा रहेगा।
NATO और अमेरिकी जनता भी नाराज
रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे के मुताबिक, दो-तिहाई अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका युद्ध में क्यों शामिल हुआ। यहां तक कि रिपब्लिकन समर्थकों का एक बड़ा हिस्सा भी जवाब चाहता है। ईंधन कीमतें बढ़ने से जनता की नाराजगी बढ़ रही है। इसे देखते हुए ट्रंप ने कहा कि वह अस्थायी रूप से पेट्रोल पर फेडरल टैक्स हटाने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी मदद नहीं मिल रही। NATO देशों ने साफ कहा है कि जब तक पूर्ण शांति समझौता नहीं होता, वे होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए नौसैनिक मिशन में शामिल नहीं होंगे। वहीं Marco Rubio ने ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की। दूसरी ओर Hakan Fidan मंगलवार को Qatar में वार्ता करेंगे, जहां समुद्री सुरक्षा और युद्धविराम पर चर्चा होगी।