Edited By Tanuja,Updated: 09 Apr, 2026 01:39 PM

अमेरिका-ईरान सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान खुद मध्यस्थ नहीं था, बल्कि व्हाइट हाउस के इशारे पर काम कर रहा था। इससे उसकी कूटनीतिक साख को झटका लगा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल...
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटिश अखबार Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने खुद को इस सीजफायर का “शांतिदूत” बताने की कोशिश की, लेकिन असलियत कुछ और ही निकली। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान स्वतंत्र मध्यस्थ नहीं था, बल्कि White House के निर्देश पर काम कर रहा था। इसका मतलब यह हुआ कि इस्लामाबाद ने अपनी ओर से कोई पहल नहीं की, बल्कि अमेरिका के कहने पर ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति की स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं और यह धारणा मजबूत हो रही है कि वह बड़े देशों के इशारों पर काम करता है।
कैसे हुआ सीजफायर?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए कड़ी चेतावनी दी थी। इसके बाद व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को एक “माध्यम” के तौर पर इस्तेमाल किया, ताकि ईरान तक संदेश पहुंचाया जा सके और अस्थायी युद्धविराम कराया जा सके। पाकिस्तान ने इस भूमिका को बाद में अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश किया, लेकिन अब सामने आई जानकारी ने उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।
क्यों उठे सवाल?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई देश वास्तव में मध्यस्थ होता है, तो वह दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर स्वतंत्र भूमिका निभाता है। लेकिन इस मामले में पाकिस्तान सिर्फ एक “संदेशवाहक” की तरह नजर आया, जिससे उसकी विश्वसनीयता कमजोर हुई है। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान भविष्य में किसी बड़े शांति प्रयास में भरोसेमंद भूमिका निभा पाएगा। साथ ही, यह भी साफ हो गया है कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करता रहा।
सीजफायर खतरे में
उधर, अमेरिका-ईरान सीजफायर खुद भी काफी नाजुक स्थिति में है। लेबनान में इज़राइल के हमले जारी हैं। ईरान ने Strait of Hormuz को लेकर सख्त रुख अपनाया है। दोनों पक्षों के बीच शर्तों पर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में यह युद्धविराम कभी भी टूट सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की कूटनीतिक साख को बड़ा झटका दिया है। जो देश खुद को शांति का दूत बता रहा था, वह अब एक “माध्यम” या “मोहरा” के रूप में देखा जा रहा है।