Edited By Tanuja,Updated: 11 Jan, 2026 07:02 PM

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया, तो ईरान जवाबी हमले में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। एक मिसाइल से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति हिल सकती है।
International Desk: मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सिर्फ एक सैन्य फैसला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है और इसका असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया हिल सकती है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर क़ालिबाफ पहले ही साफ कर चुके हैं कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो पश्चिम एशिया में मौजूद हर अमेरिकी सैन्य ठिकाना “वैध लक्ष्य” होगा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सीधी चेतावनी नहीं, बल्कि खुला युद्ध संकेत है।
क्यों खतरनाक है ट्रंप का फैसला?
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका ने दशकों से ईरान के चारों ओर कतर, बहरीन, यूएई, इराक और जॉर्डन में सैन्य अड्डों का जाल बिछा रखा है। यही अड्डे अब अमेरिका की ताकत नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकते हैं। ईरान पहले ही 2020 में इराक के ऐन अल-असद एयरबेस पर हमला कर यह दिखा चुका है कि वह अमेरिकी ठिकानों तक पहुंच रखता है। अब हालात कहीं ज्यादा विस्फोटक हैं।
ड्रोन, मिसाइल और ‘एक वार हजार असर’
एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी जवाबी कार्रवाई में ईरान ड्रोन स्वार्म और सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।“एक भी मिसाइल अगर किसी अमेरिकी जहाज या बेस को लगी, तो यह सिर्फ सैन्य नुकसान नहीं होगा यह आर्थिक सुनामी होगी।”
दुनिया की नस पर हाथ
सबसे बड़ा खतरा होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। अगर ईरान ने यहां दबाव बनाया या रास्ता बाधित किया, तो तेल के दाम आसमान छू सकते हैं, शेयर बाजार धराशायी हो सकते हैं और वैश्विक महंगाई बेकाबू हो सकती है।
खाड़ी देशों की बढ़ती घबराहट
कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देश अमेरिका की सुरक्षा छतरी के नीचे हैं, लेकिन वे नहीं चाहते कि उनके देश ईरान-अमेरिका जंग के पहले मैदान बनें। इसी वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट घोषित किया जा रहा है।
एक्सपर्ट्स का साफ संदेश
रक्षा विशेषज्ञों की दो टूक राय है-“यह सिर्फ ईरान बनाम अमेरिका नहीं है। यह फैसला पूरी वैश्विक व्यवस्था, तेल बाजार और आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है। एक गलत कदम और दुनिया युद्ध के दलदल में फंस सकती है।”