Edited By Anu Malhotra,Updated: 31 Mar, 2026 01:53 PM

स्वीडन से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहां एक 62 वर्षीय व्यक्ति पर अपनी ही पत्नी को वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने और लगभग 120 पुरुषों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का संगीन आरोप लगा है। यह...
इंटरनेशनल डेस्क: स्वीडन से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहां एक 62 वर्षीय व्यक्ति पर अपनी ही पत्नी को वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने और लगभग 120 पुरुषों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का संगीन आरोप लगा है। यह मामला इतना वीभत्स है कि इसकी तुलना फ्रांस के कुख्यात 'गिज़ेल पेलिकॉट' केस से की जा रही है, जिसने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी थी।
शोषण और क्रूरता की सारी हदें पार
आरोपी शख्स, जो कभी 'हेल्स एंजल्स' जैसे खतरनाक गिरोह का सदस्य रह चुका है, पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी की नशे की लत और उसकी लाचारी का फायदा उठाया। उसने न केवल अपनी पत्नी के लिए ऑनलाइन ग्राहक खोजे और सौदे तय किए, बल्कि उसे ड्रग्स देकर और डरा-धमकाकर लगातार यौन शोषण का शिकार बनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह सिर्फ देह व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि यह 'निर्दयी शोषण' है।
जब पत्नी ने किया विरोध, तो मिली दरिंदगी
हैरानी की बात यह है कि आरोपी ने महिला पर ऑनलाइन वीडियो बनाने और अजनबियों के सामने खुद को पेश करने का भारी दबाव बनाया। जब भी पीड़िता ने किसी खास व्यक्ति या परिस्थिति में मना करने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और रेप जैसी वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह भयावह सिलसिला अगस्त 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच चलता रहा। महिला की शिकायत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उस पर रेप, वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने और मारपीट के गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
कानून के घेरे में 120 खरीदार
स्वीडन के सख्त कानूनों के तहत यौन संबंध बेचना अपराध नहीं है, लेकिन उन्हें खरीदना गैरकानूनी है। इस मामले में पुलिस ने उन 120 पुरुषों की पहचान कर ली है जिन्होंने महिला की बेबसी का सौदा किया था। इनमें से 26 लोगों पर पहले ही आरोप तय हो चुके हैं, जबकि बाकी के खिलाफ जांच जारी है। स्वीडन की जेंडर इक्वलिटी मंत्री नीना लार्सन ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि पुरुषों को महिलाओं के शरीर की खरीद-फरोख्त हर हाल में बंद करनी चाहिए। इस मामले की अदालती सुनवाई 13 अप्रैल से शुरू होने वाली है, जिससे अब पीड़िता को न्याय की उम्मीद है।