Edited By Pardeep,Updated: 17 Mar, 2026 09:19 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को नाटो पर तीखा हमला बोला। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य ऑपरेशन में नाटो के कई सहयोगी देश पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को नाटो पर तीखा हमला बोला। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य ऑपरेशन में नाटो के कई सहयोगी देश पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
“ज्यादातर नाटो देश शामिल नहीं होना चाहते”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका को उसके ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने साफ बता दिया है कि वे इस सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा: “अमेरिका को उसके अधिकांश नाटो सहयोगियों ने सूचित किया है कि वे मिडिल ईस्ट में ईरान के ‘आतंकी शासन’ के खिलाफ हमारे सैन्य ऑपरेशन में शामिल नहीं होना चाहते। यह तब है जब लगभग सभी देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए।”
“फैसले से हैरान नहीं हूं”
नाटो देशों के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें इसमें कोई हैरानी नहीं हुई।
“नाटो एकतरफा सौदा है”
ट्रंप ने नाटो को “वन-वे स्ट्रीट” (एकतरफा व्यवस्था) बताया और कहा कि अमेरिका हर साल सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करके इन देशों की सुरक्षा करता है लेकिन जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो ये देश साथ नहीं देते। उन्होंने कहा: “मैं पहले से मानता रहा हूं कि नाटो एकतरफा है—हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन वे हमारे लिए कुछ नहीं करते, खासकर जरूरत के समय।”
क्यों बढ़ा विवाद?
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज हुई है। कई यूरोपीय देश इस युद्ध में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
क्यों अहम है यह बयान?
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नाटो के अंदर दरार के संकेत
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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध पर वैश्विक असहमति
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अमेरिका की “अकेले कार्रवाई” (unilateral action) की नीति मजबूत होती दिख रही
ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश देता है कि इस युद्ध में अमेरिका अपने सहयोगियों के बिना भी आगे बढ़ने को तैयार है।