ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, युद्ध पर वोटिंग की तैयारी में हैं डेमोक्रेट्स

Edited By Updated: 06 Nov, 2026 08:22 AM

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (स्थानीय समय) को ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई करने का संकेत दिया। वहीं हाउस के वरिष्ठ डेमोक्रेट्स ने युद्ध को खत्म करने के लिए वोटिंग कराने की योजना बनाई है और वे इस युद्ध के उद्देश्यों तथा इसमें होने...

वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (स्थानीय समय) को ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई करने का संकेत दिया। वहीं हाउस के वरिष्ठ डेमोक्रेट्स ने युद्ध को खत्म करने के लिए वोटिंग कराने की योजना बनाई है और वे इस युद्ध के उद्देश्यों तथा इसमें होने वाले खर्च के बारे में जवाब मांग रहे हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'अगर संभव हो तो मैं बाकी देश को बर्बाद नहीं करना चाहूंगा लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े। आपको जल्द ही पता चल जाएगा।' 

उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए कोई समय-सीमा या लक्ष्य नहीं बताया और न ही यह घोषणा की कि कोई नया हमला करने का आदेश दिया गया है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डेमोक्रेट्स अगली कांग्रेस के लिए अपनी विदेश नीति का एजेंडा तैयार कर रहे हैं। प्रतिनिधि ग्रेगरी मीक्स ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रस्ताव लाने का वादा किया है जबकि डेमोक्रेटिक व्हिप कैथरीन क्लार्क ने युद्ध के लक्ष्यों और इससे बाहर निकलने की रणनीति (एग्जिट स्ट्रेटेजी) पर सवाल उठाए हैं। 

उनके ये बयान ट्रंप की ताजा टिप्पणी से पहले आए थे। ये बयान ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ कांग्रेस के विरोध को दर्शाते हैं, न कि गुरुवार दोपहर की चेतावनी पर कोई प्रतिक्रिया हैं। ओवल ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सैन्य अभियान का बचाव किया और कहा कि आगे क्या करना है, इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने अपनी इस बात को भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। 

तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रस्तावों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'वे हमारी मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं कर रहे हैं।' ट्रंप ने किसी प्रस्ताव की सामग्री की पुष्टि नहीं की और न ही बातचीत के किसी तय ढांचे के बारे में बताया। उनकी बातों से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि आगे सैन्य कार्रवाई होगी या कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाएगा। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट, ग्रेगरी मीक्स ने 4 नवंबर को लिखे एक पत्र में अपनी योजनाएं बताईं। उन्होंने कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए अपने सहयोगियों से समर्थन मांगा है।

उन्होंने लिखा, 'विधायी स्तर पर, मैं ईरान के साथ राष्ट्रपति के युद्ध को तुरंत समाप्त करने के लिए प्रस्ताव लाऊंगा। साथ ही अमेरिकी विदेश नीति तय करने में कांग्रेस की जो उचित भूमिका है, उसे वापस बहाल करने को प्राथमिकता दूंगा।' पत्र में यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि ईरान युद्ध, वेनेजुएला, और सैन्य कार्रवाई तथा व्यापार पर कांग्रेस के अधिकार से जुड़े विवादों को लेकर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सार्वजनिक रूप से गवाही मांगी जाए। मीक्स ने अपनी विधायी और निगरानी संबंधी योजनाओं के बारे में बताया था। पत्र में वोटिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है और न ही इस वादे को लागू करने वाला कोई नया प्रस्ताव पेश किया गया है। इससे पहले क्लार्क ने CNN को बताया कि डेमोक्रेट्स प्रशासन पर इस संघर्ष के लिए लगातार फंडिंग जारी रखने और अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित घर वापस लाने की योजना के बारे में सवाल करेंगे।

ट्रम्प के दोपहर के बयानों से पहले उनके (क्लार्क के) कार्यालय ने इस साक्षात्कार के कुछ अंश जारी किए। क्लार्क ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया कि वे देश को 'एक ऐसे लापरवाह युद्ध में धकेल रहे हैं, जिसकी न तो कोई एग्जिट स्ट्रेटेजी (बाहर निकलने की रणनीति) है और न ही कोई स्पष्ट लक्ष्य है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष की वजह से घरेलू ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स प्रशासन के उद्देश्यों पर चर्चा करना चाहेंगे और यह जानना चाहेंगे कि अमेरिकियों और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस युद्ध को कैसे खत्म किया जा सकता है।

दोनों डेमोक्रेट्स ने प्रशासन को चुनौती देने के लिए अलग-अलग तरीकों पर जोर दिया। मीक्स ने सदन में प्रस्ताव लाने और गवाही लेने का सुझाव दिया, जबकि क्लार्क ने फंडिंग, जनता पर पड़ने वाले खर्च और एग्जिट स्ट्रेटेजी पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें से किसी भी बयान का मतलब राष्ट्रपति पर कोई नई पाबंदी लगाना नहीं था। खाड़ी क्षेत्र का यह संघर्ष भारत सहित एशिया के प्रमुख ऊर्जा आयातकों के लिए भी चिंता का विषय है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को तेल परिवहन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग मानती है। इस जलमार्ग से जाने वाले तेल के मुख्य गंतव्यों में भारत, चीन और जापान शामिल हैं। 

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