अमेरिकी रिपोर्ट में दावाः चीन को दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले में दखल पड़ेगा भारी, तिब्बती समुदाय ने ठुकराया 'पंचेन लामा’

Edited By Updated: 30 May, 2026 06:26 PM

beijing s control of tibetan spiritual leader succession lacks legitimacy

अमेरिकी पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में दावा किया गया है कि चीन द्वारा नियुक्त 11वें पंचेन लामा को तिब्बती समुदाय में व्यापक स्वीकृति नहीं मिली। लेख में चेतावनी दी गई है कि यदि बीजिंग 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी चयन में भी हस्तक्षेप करता है, तो...

Washington: अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका Journal of Democracy में प्रकाशित एक लेख ने तिब्बती बौद्ध नेतृत्व और चीन की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। लेख में कहा गया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा नियुक्त 11वें पंचेन लामा का मामला इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक वैधता सरकारी आदेशों से स्थापित नहीं की जा सकती। लेख के लेखक और Khedroob Thondup, जो  दलाई लामा के भतीजे हैं, ने कहा कि यदि चीन 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में भी इसी तरह हस्तक्षेप करता है, तो उसे तिब्बती समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है।

 

1995 का विवाद फिर चर्चा में
लेख के अनुसार, वर्ष 1995 में दलाई लामा द्वारा छह वर्षीय गेधुन चोएकी न्यिमा को 11वें पंचेन लामा के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद चीन ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसके बाद बीजिंग ने ग्यैनकैन नोरबू को पंचेन लामा घोषित किया। रिपोर्ट का दावा है कि लगभग तीन दशक बाद भी चीन द्वारा नियुक्त पंचेन लामा को तिब्बती समुदाय में व्यापक आध्यात्मिक स्वीकार्यता नहीं मिल सकी है और उनकी पहचान मुख्य रूप से चीनी सरकारी ढांचे तक सीमित है। लेख में कहा गया है कि चीन पहले ही संकेत दे चुका है कि 15वें दलाई लामा की मान्यता उसके सरकारी अनुमोदन से ही होगी। इसके लिए बीजिंग तथाकथित “गोल्डन अर्न” प्रणाली का हवाला देता है, जिसका उपयोग अतीत में कुछ धार्मिक उत्तराधिकार प्रक्रियाओं में किया गया था। हालांकि लेख का तर्क है कि दलाई लामा केवल एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि करुणा, अहिंसा और तिब्बती पहचान के वैश्विक प्रतीक हैं। इसलिए किसी भी राज्य-नियुक्त दलाई लामा को व्यापक वैधता मिलना कठिन होगा।

 

एशिया और दुनिया में पड़ सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार, यदि चीन अपने पसंदीदा उम्मीदवार को दलाई लामा घोषित करता है, तो इससे केवल तिब्बत ही नहीं बल्कि एशिया के कई बौद्ध समुदायों में भी असंतोष पैदा हो सकता है। लेख में Mongolia, Sri Lanka, Nepal और Japan जैसे देशों के बौद्ध समुदायों का उल्लेख किया गया है। लेख में कहा गया है कि तिब्बत का प्रश्न पहले से ही चीन के संबंधों में एक संवेदनशील विषय रहा है। दलाई लामा की वैश्विक प्रतिष्ठा को देखते हुए उनके उत्तराधिकारी का चयन भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों की भी निगाहों में रहेगा। रिपोर्ट का दावा है कि किसी "राज्य-प्रायोजित" दलाई लामा की नियुक्ति चीन के लिए कूटनीतिक आलोचना और अविश्वास बढ़ा सकती है, जबकि इसका उद्देश्य स्थिरता स्थापित करना बताया जाएगा।

 

तिब्बती पहचान को मिटाना आसान नहीं
लेख में यह भी कहा गया है कि दशकों से जारी सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक दबावों के बावजूद तिब्बती समाज ने अपनी भाषा, परंपराओं और धार्मिक पहचान को जीवित रखा है। लेखक का निष्कर्ष है कि जिस तरह तिब्बती समुदाय ने चीन द्वारा नियुक्त पंचेन लामा को व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया, उसी प्रकार दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे पर भी उनकी धार्मिक मान्यताओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।  

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!