UN में पाकिस्तान-चीन को बड़ा झटका; BLA को आतंकी घोषित कराने की कोशिश नाकाम, महाशक्तियों ने नहीं दी मंजूरी

Edited By Updated: 10 Jun, 2026 12:23 PM

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संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन की ओर से बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसकी मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कराने की कोशिश को अमेरिका ने रोक दिया। फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इस पहल का समर्थन नहीं किया। यह घटनाक्रम पाकिस्तान-चीन...

International Desk: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी आत्मघाती इकाई मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कराने के लिए पाकिस्तान और चीन द्वारा चलाए गए संयुक्त प्रयास को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया, जबकि फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इसका समर्थन नहीं किया। जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान और चीन ने सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के समक्ष BLA और मजीद ब्रिगेड को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इस महीने अमेरिका ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी। फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इसी रुख का समर्थन किया।

 

पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि BLA और मजीद ब्रिगेड अफगानिस्तान में मौजूद सुरक्षित ठिकानों से पाकिस्तान और विशेष रूप से बलूचिस्तान में हमलों को अंजाम देते हैं। पाकिस्तान का कहना है कि इन संगठनों के कारण उसके नागरिकों, सुरक्षा बलों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं को खतरा है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने हाल ही में सुरक्षा परिषद की बैठक में दावा किया था कि अफगानिस्तान में 60 से अधिक आतंकवादी शिविर सक्रिय हैं, जहां से आईएसआईएल-के, अलकायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, BLA और मजीद ब्रिगेड जैसी संस्थाएं गतिविधियां चला रही हैं।

 

उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और चीन ने मिलकर 1267 प्रतिबंध समिति से BLA और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन घोषित करने का अनुरोध किया है और उम्मीद जताई थी कि परिषद शीघ्र कार्रवाई करेगी। हालांकि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के रुख के कारण यह प्रयास फिलहाल सफल नहीं हो पाया। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अतीत में चीन ने कई बार भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान आधारित आतंकवादियों और संगठनों को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादी सूची में शामिल कराने के प्रस्तावों को रोक दिया था।

 

अब पहली बार चीन स्वयं किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे पश्चिमी देशों के विरोध का सामना करना पड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल आतंकवाद विरोधी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय राजनीति, अफगानिस्तान की स्थिति, बलूचिस्तान में चल रहे विद्रोह और चीन के रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में BLA को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करने का मुद्दा आने वाले समय में भी संयुक्त राष्ट्र में चर्चा का विषय बना रह सकता है।
  

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