ईरान युद्ध का असर: दक्षिण एशिया में तेल से लेकर रोटी तक संकट, ज्यादा खतरे में पाकिस्तान सहित ये 3 देश

Edited By Updated: 07 Apr, 2026 04:23 PM

why war on iran threatens to unleash unrest in south asia

ईरान युद्ध से दक्षिण एशिया में ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक संकट गहरा रहा है। भारत सहित क्षेत्र के देश तेल, गैस और रेमिटेंस पर निर्भर हैं, जिससे महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।

International Desk: ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब पूरे दक्षिण एशिया में दिखने लगा है। इस क्षेत्र के कई देश तेल, गैस और खाद के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, इसलिए जैसे-जैसे युद्ध बढ़ रहा है, महंगाई और आर्थिक दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों की स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर मानी जा रही है। इन देशों के पास पहले से ही IMF के कर्ज कार्यक्रम हैं, जिससे वे लोगों को राहत देने के लिए ज्यादा खर्च नहीं कर सकते।

 

ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे पेट्रोल, गैस और खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। इससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ रहा है। बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग, जो वहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, संकट में है। कई फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं और उत्पादन घट रहा है। इसी तरह नेपाल में भी समस्या बढ़ सकती है, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था खाड़ी देशों से आने वाले पैसों (रेमिटेंस) पर काफी निर्भर है।पाकिस्तान को आर्थिक संकट के साथ-साथ धार्मिक तनाव का भी खतरा है।

 

हाल ही में वहां विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।खेती पर भी असर पड़ सकता है। खाद (फर्टिलाइज़र) महंगा हो रहा है, जिससे उत्पादन कम हो सकता है और आगे चलकर खाद्यान्न की कीमतें और बढ़ सकती हैं।  इस संकट के बीच भारत ने अपने पड़ोसी देशों की मदद शुरू कर दी है। भारत श्रीलंका और बांग्लादेश को आपातकालीन ईंधन भेज रहा है, और आगे नेपाल को भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला, तो दक्षिण एशिया में आर्थिक संकट के साथ-साथ बड़े स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल सकते हैं।

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