Edited By Radhika,Updated: 12 May, 2026 12:04 PM

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता और डॉलर की मजबूती को देखते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से आर्थिक संयम की अपील की है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए अगले एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल व खाद्य तेल का सीमित...
Gold Strike Reasons: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर पीएम मोदी ने देशवासियों से बड़ी अपीलें की थी। 28 फरवरी से जारी इस संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। खाड़ी देशों से होने वाली कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक विशेष 'आर्थिक संयम' बरतने का आह्वान किया है।
पीएम मोदी ने की गोल्ड न खरीदने की अपील
जानकारी के लिए बता दें कि पीएम मोद ने देश की आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए लोगों से एक साल तक गोल्ड न खरीदने की अपील की है। भारत अपनी सोने की खपत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके भुगतान के लिए भारी मात्रा में डॉलर की जरूरत पड़ती है। युद्ध के कारण डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर, ऐसे में सोने के आयात को कम कर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को सुरक्षित रखा जा सकता है।

पीएम की 'गोल्ड स्ट्राइक' के तीन मुख्य कारण
-
मुद्रा स्थिरता: डॉलर के खर्च में कटौती कर भारतीय रुपये की गिरती कीमत को थामना।
-
रिसाइकिलिंग पर जोर: सरकार चाहती है कि नई खरीदारी के बजाय लोग पुराने सोने को रिसाइकिल करें, जिससे ज्वेलरी उद्योग भी चलता रहे और नया आयात भी न करना पड़े।
-
अनिवार्य खर्चों के लिए फंड: कच्चा तेल और खाद (Fertilizers) जैसी अनिवार्य वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। सोना न खरीदकर जो डॉलर बचेगा, उसे इन जरूरी चीजों के आयात में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पेट्रोल-डीजल और रसोई पर भी नजर
पीएम मोदी ने गोल्ड के अलावा रोजाना जरुरत की चीजें जैसे पेट्रोल, डीजल और खाद्य तेल (Cooking Oil) के उपभोग में भी कटौती करने का सुझाव दिया है। पीएम ने कहा कि निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। भारत हर साल लगभग 11 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल और 1.61 लाख करोड़ रुपये का खाद्य तेल आयात करता है।
उद्योग जगत में मची हलचल
पीएम मोदी की इस अपील से उद्योग जगत में हलचल पैदा कर दी है। व्यापारियों को डर है कि मांग घटने से इस क्षेत्र से जुड़े लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। वहीं, निवेशकों ने इसे भविष्य के किसी बड़े आर्थिक संकट की आहट के रूप में देखा है।