सगाई के 15 दिन बाद तिरंगे में लिपटकर घर लौटा बस्तर फाइटर का जवान, जनवरी में होनी थी शादी

Edited By Updated: 02 May, 2026 11:01 PM

a bastar fighter returned home wrapped in tricolor 15 days after his engagement

नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस घर में अभी महज 15 दिन पहले बेटे की सगाई के लड्डू बंटे थे, वहां आज बेटा तिरंगे में लिपटकर पहुंचा। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों द्वारा डंप किए गए भारी मात्रा में विस्फोटक को नष्ट करते समय हुए एक भीषण हादसे...

नेशनल डेस्क: नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस घर में अभी महज 15 दिन पहले बेटे की सगाई के लड्डू बंटे थे, वहां आज बेटा तिरंगे में लिपटकर पहुंचा। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों द्वारा डंप किए गए भारी मात्रा में विस्फोटक को नष्ट करते समय हुए एक भीषण हादसे में बस्तर फाइटर्स के चार जांबाज जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन शहीदों में आरक्षक संजय कुमार गढ़पाले की कहानी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

75 किलो विस्फोटक ने ली चार जान
यह दर्दनाक हादसा 2 मई 2026 को कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के जंगलों में हुआ। सुरक्षा बल के जवानों को माओवादियों द्वारा डंप किए गए सामान की सूचना मिली थी। सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों को 15-15 किलो की 5 बोरियां मिलीं, जिनमें करीब 75 किलो 'पटाखा पाउडर' भरा हुआ था। जैसे ही जवान इस विस्फोटक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे थे, तभी एक जोरदार धमाका हुआ।

इस धमाके में संजय कुमार गढ़पाले के साथ निरीक्षक सुखराम वट्टी और आरक्षक कृष्णा कोमरा मौके पर ही शहीद हो गए। चौथे जवान आरक्षक परमानंद कोर्राम की मृत्यु अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई।

जनवरी में सजने वाला था सेहरा
शहीद संजय गढ़पाले (29) कांकेर के ग्राम हराडुला के रहने वाले थे। उनके पिता गांव में ही एक छोटी सी साइकिल स्टोर की दुकान चलाते हैं। संजय बचपन से ही वर्दी पहनने का सपना देखते थे और 2022 में उनका चयन 'बस्तर फाइटर्स' में हुआ था। अभी 15 दिन पहले ही संजय 5 दिन की छुट्टी लेकर अपनी सगाई के लिए घर आए थे। परिवार ने जनवरी 2027 में उनकी शादी की तारीख तय कर दी थी, लेकिन सेहरा सजने से पहले ही घर के दरवाजे पर उनकी शहादत की खबर पहुंच गई।

गांव में पसरा मातम
संजय के पिता सुरेश गढ़पाले बदहवास हैं। उन्होंने बताया कि बेटा परिवार के सारे सपने पूरे करना चाहता था, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया। पूरे गांव में मातम का माहौल है और अपने लाडले सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों की आंखें नम हैं।

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