ईरान युद्ध में PM मोदी की ‘अग्निपरीक्षा’: अमेरिका-इजरायल रिश्तों के बीच फंसा भारत, तेल से चाबहार पोर्ट तक दांव पर

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 06:17 PM

a geoeconomic fallout of the us israel iran conflict on india

ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत पर ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है। कई तेल और गैस टैंकर रास्ते में फंसे हैं। भारत को कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच मुश्किल रणनीतिक स्थिति का सामना...

International Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने भारत की विदेश नीति को कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते टकराव के बीच भारत को संतुलन साधना पड़ रहा है।  प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत एक तरफ अमेरिका और इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर ईरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम साझेदार रहा है। यही वजह है कि मौजूदा युद्ध भारत के लिए कूटनीतिक “अग्निपरीक्षा” बन गया है।

 

होर्मुज संकट से ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा

  • मध्य-पूर्व के तनाव का सबसे बड़ा असर Strait of Hormuz पर दिखाई दे रहा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।
  • दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है
  • भारत खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस पर काफी निर्भर है
  • कई तेल और गैस टैंकर क्षेत्र में तनाव के कारण प्रभावित हुए हैं
  • यदि इस मार्ग में बाधा आती है तो भारत में ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

 

सस्ते ईरानी तेल की उम्मीद पर असर
भारत पहले लंबे समय तक ईरान से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहा था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबाव के कारण भारत को ईरानी तेल आयात बंद करना पड़ा। इसके बाद भारत को महंगे वैश्विक बाजार से तेल खरीदना पड़ा। ऊर्जा आयात बिल में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा। मौजूदा युद्ध ने सस्ते तेल की संभावनाओं को और भी अनिश्चित बना दिया है।

 

चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट भी दांव पर
भारत के लिए ईरान का Chabahar Port बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। यह परियोजना भारत को Afghanistan और मध्य एशिया तक व्यापार मार्ग देने के अलावा Pakistan को बायपास करने का विकल्प प्रदान करती है लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना का भविष्य भी अनिश्चितता में घिर सकता है।

 

अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ते रिश्ते
पिछले कुछ वर्षों में भारत के संबंध United States और Israel के साथ तेजी से मजबूत हुए हैं। लेकिन यही समीकरण अब ईरान के साथ संतुलन बनाना और कठिन बना रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस संकट में तीन स्तरों ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों की स्थिरता,अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच कूटनीतिक व चाबहार जैसे रणनीतिक निवेशों की सुरक्षा पर संतुलन बनाना होगा। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्गों और विदेश नीति पर गहरा पड़ सकता है।

 

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!