Edited By Mansa Devi,Updated: 19 Jun, 2025 03:02 PM

एयर इंडिया के इस भयावह हादसे की जाँच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच रही है। ब्लैक बॉक्स की डेटा रिकवरी से उम्मीद की जा रही है कि हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी, जिससे भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा। आने वाले हफ्तों में इसकी रिपोर्ट भारत के...
नेशनल डेस्क: हाल ही में लंदन जा रहे एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान की दुर्घटना ने देश और विदेश को हिला कर रख दिया। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस विमान के क्रैश में केवल एक यात्री जीवित बचा, जबकि बाकी सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों की मौत हो गई। हादसे की असली वजह क्या थी, इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए ब्लैक बॉक्स से मिलने वाला डेटा सबसे अहम कड़ी माना जाता है।
ब्लैक बॉक्स जलकर हुआ राख, अब अमेरिका भेजा जाएगा
सूत्रों के मुताबिक, विमान में लगे फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। भारत में इस गंभीर रूप से प्रभावित उपकरण से डेटा रिकवर करना संभव नहीं हो पाया है, इसलिए इसे अब अमेरिका स्थित नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड, वॉशिंगटन भेजा जाएगा। वहां की एडवांस लैब में प्रयास किया जाएगा कि हादसे से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी किसी तरह निकाली जा सके।
दिल्ली में भी है लैब, लेकिन पूरी तरह सक्षम नहीं
हालांकि भारत ने पिछले वर्ष ही दिल्ली में एक आधुनिक विमान जांच प्रयोगशाला स्थापित की थी, लेकिन इतने ज्यादा डैमेज हुए ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालना अब भी बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि अमेरिकी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया गया है।
ब्रिटेन की एजेंसी भी करेगी जांच में सहयोग
इस विमान में 53 ब्रिटिश नागरिक भी सवार थे, इसलिए ब्रिटेन की एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्रांच को भी इस जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है। यह बहुराष्ट्रीय जांच अब भारत, अमेरिका और ब्रिटेन की एजेंसियों के सहयोग से आगे बढ़ेगी।
ब्लैक बॉक्स: दुर्घटनाओं का मूक गवाह
ब्लैक बॉक्स में दो मुख्य उपकरण होते हैं—फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, जो विमान की तकनीकी जानकारी जैसे गति, ऊंचाई और दिशा रिकॉर्ड करता है, और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, जो पायलटों की बातचीत, अलार्म और इंजन की आवाजें रिकॉर्ड करता है। यह उपकरण खासतौर से नारंगी रंग में होता है ताकि दुर्घटना स्थल पर आसानी से पहचाना जा सके और उच्च तापमान व झटकों को झेल सके।