Edited By ,Updated: 28 Jul, 2015 11:26 AM

उत्तर प्रदेश में बरेली के त्रिशूल हवाई अड्डे के रनवे पर तकरीबन 42 साल पहले सुखोई.16 जैट ने महज 12 सौ मीटर दौडऩे के बाद ही उड़ान भर दी थी
बरेली: उत्तर प्रदेश में बरेली के त्रिशूल हवाई अड्डे के रनवे पर तकरीबन 42 साल पहले सुखोई.16 जैट ने महज 12 सौ मीटर दौडऩे के बाद ही उड़ान भर दी थी और तब इस कारनामे को वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने रॉकेट एसीस्टेड टेक ऑफ सिस्टम (राटो) के इस्तेमाल से अंजाम दिया था। यह आठ अक्टूबर 1972 की तारीख थी जब त्रिशूल में राटो का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। अमूमन दो किलोमीटर रनवे पर दौडऩे वाले सुखोई.16 जेट ने सिर्फ 1200 मीटर के छोटे रनवे पर ही दौड़कर उड़ान भर दिखाई।
दरअसल , चीन से युद्ध के बाद भारतीय वायुसेना को रनवे पर बहुत थोड़ी सी दौड़ के बाद विमानों के उड़ान भरने वाली तकनीकी की बेहद जरूरत थी। डा़ कलाम ने तब राटो के रूप में यह सिस्टम विकसित किया। इसके प्रयोग के लिए वह त्रिशूल हवाई अड्डे पर आए थे और वैज्ञानिकों की टीम के साथ यहां के रनवे.3 पर सुखोई.16 जैट उड़ाकर भारतीय वायु सेना को बड़ी उपलब्धि प्रदान की थी।
पूर्व राष्ट्रपति डा़ एपीजे अदुल कलाम की वैज्ञानिक प्रतिभा का पूरा देश ही कायल है। उनके निधन की सूचना से जरी नगरी बरेली में हर कोई अवाक रह गया। प्रबुद्ध वर्ग और सभी दलों के नेताओं के अलावा अधिकारियों ने भी कलाम के निधन को देश की अपूर्णनीय क्षति करार दिया है।