एयर इंडिया और इंडिगो की बढ़ी टेंशन, बंद होने की कगार पर पहुंचा परिचालन, एयरलाइन्स ने केंद्र से मांगी वित्तीय मदद

Edited By Updated: 28 Apr, 2026 05:19 PM

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मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने Indian aviation sector की टेंशन बढ़ा दी हैं। ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण कई एयरलाइंस ने परिचालन बंद होने की चेतावनी दी है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन...

नेशनल डेस्क : मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने Indian aviation sector की टेंशन बढ़ा दी हैं। ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण कई एयरलाइंस ने परिचालन बंद होने की चेतावनी दी है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर जल्दी ही हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता की मांग रखी है।

ATF की कीमतों ने बिगाड़ा गणित

एयरलाइंस का कहना है कि विमान ईंधन (ATF) की लागत उनके कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% होती है। FIA के अनुसार, ईंधन की कीमतों में irrational बढ़ोतरी से एयरलाइंस को नुक्सान हो रहा है,जिसके चलते विमानों के खड़े होने और उड़ानों के रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है। 

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मुख्य चिंताएं और मांगें

 सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में वृद्धि को ₹15 प्रति लीटर तक सीमित रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह बढ़ोत्तरी ₹73 प्रति लीटर तक पहुँच गई है। इसी के साथ एयरलाइंस ने सरकार ये यह भी अनुरोध किया है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए ईंधन की कीमतें एक समान तय की जाएं, जैसा पहले होता था। एयरलाइंस ने ATF पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को फिलहाल स्थगित करने की मांग की है, ताकि गिरते रुपये और बढ़ती कीमतों के दोहरे बोझ को कम किया जा सके।

इस संकट के पीछे का कारण

विमानन क्षेत्र में आई इस उथल-पुथल का सीधा संबंध अमेरिका-ईरान युद्ध और Strait of Hormuz की नाकेबंदी से है। क्योंकि दुनिया के कुल तेल का 5 वां हिस्सा यहीं से गुजरता है। युद्ध के दौरान ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने के कारण सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे देशों से होने वाली तेल सप्लाई रुक गई है। इससे ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

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लंबी दूरी की उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर

FIA का कहना है कि लंबी दूरी (Long-haul) वाले अंतरराष्ट्रीय रूट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अगर सरकार ने जल्द ही कोई वित्तीय पैकेज या नीतिगत राहत नहीं दी, तो इंडस्ट्री का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

 

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